Aligarh Muslim University News 2 November 2023

एमडी फार्माकोलॉजी के नए छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

एमडी फार्माकोलॉजी के नए छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

 

अलीगढ़ 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में विशेष रूप से 2023 में प्रवेश पाने वाले एमडी फार्माकोलॉजी रेजिडेंट्स के लिए एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

नए प्रवेशित छात्रों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सैयद जियाउर रहमान ने कहा कि फार्माकोलॉजी स्ट्रीम एक विषय के रूप में लोकप्रियता हासिल कर रही है और पहली बार सभी सीटें बाहरी उम्मीदवारों से भरी गयी हैं।

उन्होंने सर सैयद अहमद खान के जीवन और योगदान के बारे में गहराई से जानकारी दी, जिन्होंने सभी नागरिकों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया था।

डॉ. जमील अहमद ने विभाग में उपलब्ध सुविधाओं और राष्ट्रीय विकास में विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला।

डॉ. बुशरा हसन खान और डॉ. इरफान अहमद खान ने जेएनएमसी और विभाग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी प्रदान की और जेएनएमसी के प्रख्यात डॉक्टरों के योगदान और पिछले एक दशक में कॉलेज की रैंकिंग को भी उजागर किया।

उन्होंने एमडी फार्माकोलॉजी पाठ्यक्रम के लिए हालिया एनएमसी दिशानिर्देशों और नियमों के बारे में भी बताया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शमीमा पी. ने किया।

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प्रभावी सीवी लेखन पर कार्यशाला आयोजित

 

अलीगढ़ 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में स्टूडैंट चैप्टर आफ द इंटरनेशनल अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (एसीएस) ने ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिस (जनरल) के सहयोग से औद्योगिक रसायन विज्ञान विभाग के पीजी छात्रों के लिए पेशेवर सफलता के लिए आपका पासपोर्टथीम के साथ एक सीवी राइटिंग वर्कशॉप; का आयोजन किया।

रिसोर्स पर्सन, सहायक टीपीओ डॉ. मुजम्मिल मुश्ताक ने एक प्रभावी सीवी तैयार करने के बारे में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया और एक पेशेवर सीवी लिखने के लिए प्रासंगिक नियमों पर भी चर्चा की। उन्होंने किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए प्रासंगिक कौशल की आवश्यकता पर जोर दिया तथा प्रतिभागियों के साथ सीवी की नमूना प्रतियां भी साझा की गईं।

ट्रेनिंग और प्लेसमेंट अधिकारी श्री साद हमीद ने नौकरी के लिए साक्षात्कार के नियमों के बारे में बात की और सीवी लेखन के संबंध में छात्रों के प्रश्नों के उत्तर दिए।

एसीएस के एएमयू चैप्टर के संकाय सलाहकार डॉ. मोहम्मद जैन खान ने छात्रों को रोजगार योग्य और पेशेवर रूप से सुसज्जित बनाने के लिए ऐसी कार्यशालाओं की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उन्हें प्लेसमेंट के अवसरों से अवगत कराया और उनसे खुद को अन्य पारस्परिक कौशल से लैस करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम का संचालन एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री की छात्रा सुश्री आयशा फातिमा, श्री जुनेद और सुश्री खुशनेदा जबीन ने किया।

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‘अपने अंदर से उपचार’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन

अलीगढ़ 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र परामर्श केंद्र द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर देते हुए अपने अंदर से उपचारः आघात और दुख प्रबंधनविषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। आघात और दुःख को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, कार्यशाला में भाग लेने वाले छात्रों और शिक्षकों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता और समझ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, छात्र परामर्श केंद्र की समन्वयक डॉ. एस. रेशमा जमाल ने कार्यक्रम के विषय पर चर्चा की और एक टेलीसाइकोलॉजी पोर्टल, स्पीकिंगक्यूब की निदेशक, प्रो. दीपिका चमोली शाही, संसाधन व्यक्ति का परिचय दिया।

संज्ञानात्मक और बाल मनोविज्ञान की विशेषज्ञ प्रोफेसर शाही ने मांसिक आघात के जटिल पहलुओं और व्यक्तियों पर इसके बहुमुखी प्रभाव पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने विभिन्न प्रकार के आघातों को पहचानने के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें बचपन के आघात और किसी के मनोवैज्ञानिक कल्याण पर उनके संभावित दीर्घकालिक प्रभाव शामिल हैं। अपनी व्यापक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, उन्होंने भावनात्मक उपचार की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए दुःख को स्वीकार करने और उसे प्रबंधित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रोफेसर शाही ने आघात से उबरने के प्रयास में आत्म-करुणा और आत्म-देखभाल के महत्व को रेखांकित किया, और व्यक्तियों को लचीलापन और आंतरिक शक्ति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भावनात्मक संघर्ष की स्थिति में परिवार, साथियों और दोस्तों से समर्थन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, जटिल भावनात्मक परिस्थितियों को प्रबंधित करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों को शामिल करते हुए प्रभावी दुःख प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यासों में भी शामिल किया, जिससे उन्हें सांस लेने के व्यायाम और भावनात्मक विनियमन सहित विभिन्न विश्राम तकनीकों को सीखने में मदद मिली।

डॉ. सारा जावेद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यशाला में 80 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई।

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डेंटल कॉलेज में चंद्रयान-3 महा क्विज का आयोजन किया गया

3 महा क्विज का आयोजन किया गया

अलीगढ़ 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कॉलेज द्वारा छात्रों को चंद्र अन्वेषण में भारत की हालिया प्रगति से परिचित कराने के लिए चंद्रयान-3 महा क्विज का आयोजन किया गया, जिस से छात्रों को वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ।

कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आर के तिवारी ने कहा कि क्विज प्रतियोगिता छात्रों में वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन पर आधारित इस प्रश्नोत्तरी में बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर अंतरिक्ष अन्वेषण और वैज्ञानिक जांच के प्रति अपनी रूचि व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि आधिकारिक वेबसाइट, इसरो क्विज के माध्यम से सुलभ क्विज ने छात्रों को अंतरिक्ष, चंद्रयान मिशन और खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के व्यापक क्षेत्र के बारे में अपने ज्ञान के परीक्षण करने के लिए एक आकर्षक मंच प्रदान किया है।

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इंटर स्कूल क्विज प्रतियोगिता आयोजित

 

अलीगढ 2 नवम्बरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एस.टी.एस. स्कूल (मिंटो सर्कल) द्वारा सर सैयद दिवस समारोह के अंतर्गत सर सैयद और अलीगढ़ आंदोलनविषय पर एक अंतर-विद्यालय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

एएमयू एबीके हाई स्कूल (गर्ल्स) की नूर अकदस और हिफ्जा ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि आरएमपीएस एएमयू सिटी स्कूल के आरिफ और मोहम्मद आमिर और एएमयू गर्ल्स स्कूल की अजका शफिया और अरीबा परवेज की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया।

तीसरा स्थान एसटीएस स्कूल के प्रवीण कुमार और अयमन हाफिज को मिला।

क्विज प्रतियोगिता में एक लिखित राउंड, वार्म अप राउंड और सर सैयद अहमद खान के जीवन, उनके शैक्षिक सुधारों और समाज पर अलीगढ़ आंदोलन के प्रभाव से संबंधित प्रश्न-उत्तर सत्र शामिल था। प्रतिभागियों को कई टीमों में विभाजित किया गया था।

विशेष अतिथि, अहमदी स्कूल फॉर विजुअली चैलेंज्ड की प्रिंसिपल, डॉ. नायला राशिद ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर पर ध्यान केंद्रित करें कि ऐसे आयोजन उन्हें व्यक्तित्व विकास के लिए अवसर प्रदान करते हैं और अगर वे जीत हासिल करने में असफल भी होते हैं तो निराश न हों।

स्कूल के प्रधानाचार्य श्री फैसल नफीस ने विजेताओं को बधाई दी और प्रतिभागियों से तर्कसंगत सोच विकसित करने का आग्रह किया जिसकी सर सैयद ने सबसे अधिक वकालत की थी।

श्री नूरुज्जमान अरशद ने श्रीमती गजाला तनवीर के साथ कार्यक्रम का संचालन किया।

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श्योर वर्कशॉप के लिए पंजीकरण शुरू

 

अलीगढ़, 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग ने 28 नवंबर 2023 से आयोजित होने वाली 12 सप्ताह की श्योर (उद्यमिता के माध्यम से शहरी नवीकरण को प्रोत्साहित करना) कार्यशाला के लिए इच्छुक और योग्य व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह कार्यशाला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और ह्यूस्टन विश्वविद्यालय (यूएसए) के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

प्रोफेसर आसिया चैधरी (वाणिज्य विभाग), कार्यशाला की संयोजक एवं निदेशक ने बताया कि वाणिज्य, अर्थशास्त्र और प्रबंधन के छात्र या कोई भी जो उद्यमी बनना चाहता है और अपना स्टार्ट-अप स्थापित करना चाहता है या तकनीकी और व्यावसायिक कौशल विकसित करना चाहता है और विचारों को क्रियान्वित करना चाहता है, कार्यशाला के लिए पंजीकरण करा सकता है।

कार्यशाला के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 5 नवंबर, 2023 है।

इच्छुक व्यक्ति अधिक जानकारी के लिए श्री मुशाहिद अली शम्शी (9045713012), या नबीला मिर्जा (9319719371) से संपर्क कर सकते हैं।

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भारतीय भाषाओं के संदर्भ में हिंदी-उर्दू के परस्पर संबंध विषय पर हिन्दी विभाग में व्याख्यान

 

अलीगढ़, 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित भारतीय भाषा उत्सवकार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय भाषाओं के संदर्भ में हिंदी-उर्दू के परस्पर संबंधविषय पर व्याख्यान में बोलते हुए उर्दू अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ राहत अबरार ने कहा कि व्यक्ति अपने धर्म को छोड़ सकता है किंतु अपनी भाषा को नहीं छोड़ सकता है। हमारी विरासत हमारी अपनी भाषाओं को संरक्षित करने की रही है। सर सैयद वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हिंदुस्तानी भाषा में शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित किया था। सर सैयद का मानना था कि वर्नाक्यूलर भाषा से ही देश की प्रगति संभव है। सर सैयद उर्दू के साथ-साथ भारत की दूसरी भाषाओं के बड़े पैरोकार था। उर्दू जबान को सजाने-संवारने में अलीगढ़ और सर सैयद की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। अपने विचारों को आगे बढ़ाते हुए डॉ अबरार ने कहा कि नवजारणकालीन भारत में झगड़ा भाषा का न होकर लिपि का झगड़ा था किंतु अंग्रेजों ने इसे भाषा का झगड़ा बना दिया। अंग्रेजों ने पहला काम फारसी के स्थान पर उर्दू को स्थापित करके भाषाओं के बीच दरार डालने का काम किया। मुसलमानों की भाषा फारसी थी, न कि उर्दू। सर सैयद ने उर्दू को सजाया-संवारा किंतु प्रत्येक भारतीय भाषों को प्रोत्साहित करने का काम भी किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशिक अली ने कहा कि भारत सरकार का यह एक आवश्यक पहल है किंतु इसमें केवल सरकार की पहल से नहीं बल्कि हम लोगों को भी अपनी भाषा को बचाने के लिए पहल करने की आवश्यकता है। भाषा को बचाने से पहले आज अपनी संस्कृति को बचाना आवश्यक है। हमारी संस्कृति पर पूंजीवाद का दबाव आज अधिक है। संस्कृति बहुत तेजी से परिवर्तित हो रही है तो भाषा भी परिवर्तित हो रही है। आज बाजार और रोजगार की भाषा अंग्रेजी है। हिंदी को आज सबसे पहले रोजगार की भाषा बनाने की आवश्यकता है। धर्म, जाति और लिंग से परे होकर आज बोलियों एवं भाषा को अपनाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने नवजारणकालीन भारत में हिंदी-उर्दू विवाद के आलोक में अपने विचारों को प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी-उर्दू को भारतीय भाषाओं के करीब लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रश्न-उत्तर के दौरान विभाग के शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने गंभीर प्रश्न पूछे जिनका उत्तर वक्ता ने सहज रूप में दिया। इस अवसर पर डॉ. राहत अबरार ने अपनी दो पुस्तकें हिंदी विभाग की लाइब्रेरी को भेंट की। इस अवसर पर हिंदी विभाग के अध्यापकगण, शोधार्थीगण एवम विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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सप्ताह भर चलने वाले सीरत-उल-नबी कार्यक्रम का समापन

 

अलीगढ़, 2 नवंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की सीरत कमेटी के तत्वावधान में सप्ताह भर चलने वाले सीरत-उल-नबी (पैगंबर मोहम्मद का जीवन) कार्यक्रम समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज ने की।

प्रोफेसर गुलरेज ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों का पालन-पोषण पैगंबर के जीवन के प्रकाश में करना चाहिए क्योंकि उनसे बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से न केवल छात्रों की रुचि बढ़ती है बल्कि उनमें पैगंबर की जीवनी का अध्ययन करने और उसका पालन करने का जुनून भी पैदा होता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रोफेसर तौकीर आलम, डीन, धर्मशास्त्र संकाय ने कहा कि बच्चों को पैगंबर के जीवन के बारे में पढ़ाना और उन्हें उनके संदेश को समझाना हमारा कर्तव्य है।

सम्मानित अतिथि, धर्मशास्त्र संकाय के पूर्व डीन, प्रोफेसर मोहम्मद सलीम ने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों ने हदीस और कुरान की आयतों के प्रकाश में पैगंबर के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया।

इससे पूर्व सीरत कमेटी के संयोजक और सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद हबीबुल्लाह ने मेहमानों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया।

समापन समारोह का संचालन डॉ. नदीम अशरफ ने किया।

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