यहां ज़मीन और मकान बचाने का आंदोलन पिछले साल 13 अक्टूबर से जारी है।
तब से अब तक यह आंदोलन अपने जुझारू तेवरों और साफ़ समझ के साथ हर रोज़ यही चाहत दर्ज़ करा रहा है कि गणतंत्र में जनगणमन की सर्वोच्चता का सम्मान हो।
अब 26 जनवरी को भी किसान परेड की शक्ल में यह आवाज़ गूंजेगी।
26 जनवरी को सुंदर, अद्भुत और ऐतिहासिक नज़ारा होगा।
उस दिन खिरिया बाग से किसान परेड कदमताल करेगी।
लोगों के हाथों में तिरंगा और नारा लिखी तख्तियां।
परेड में गाते थिरकते जत्थे भी होंगे।
परेड का समापन आज़मगढ़ कलेक्ट्रेट स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर होगा।
जैसे बिना कहे कहा जा रहा होगा कि आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण और संवैधानिक है, बाबा साहब के विचारों के मुताबिक है।
हवाई अड्डे के विस्तारीकरण या ऐसे ही किसी पगलाये धूर्त विकास के नाम पर लोग अपनी ज़मीन और मकान स्वाहा करने को तैयार नहीं, किसी झांसे आनेवाले नहीं।
इतना जागरूक हैं कि झूठ, फरेब, प्रपंच, भय या प्रलोभन की हर कोशिश औंधेमुंह गिरेगी।
अच्छा यही होगा कि सरकार प्रशासन उनके भले का कोई भ्रमजाल ना बुने और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दे।
यह जनगण की चाहत है। किसान परेड का यही बयान है।