कमांडेंट अनिल ध्यानी बने डीआईजी अलीगढ़ में आरएएफ 104 बटालियन में दे चुके हैं सेवाएं

अलीगढ़ में आरएएफ 104 बटालियन में दे चुके हैं सेवाएं, ईमानदार और सराहनीय सेवाओं के लिए मिले हैं कई पुरस्कार

अलीगढ़ में आरएएफ बटालियन 104 में कमांडेंट के पद पर तैनात रहे अनिल कुमार ध्यानी को के पुलिस महानिरीक्षक देहरादून सेक्टर सीआरपीएफ भानु प्रताप सिंह द्वारा कंधे पर सितारे लगाकर डीआईजी रैंक पर पदोन्नत किया गया है। 31 मई को मुख्यालय से उनकी पदोन्नति के लिए आदेश जारी किए गए, जिसके बाद उन्हें कमांडेंट से पुलिस उप महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत कर दिया गया।

डीआईजी ध्यानी ने 1994 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में बतौर सहायक कमांडेंट अपनी सेवाएं शुरू की थी। इसके बाद वह लगातार सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपने 28 वर्ष के कार्यकाल में वह देश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं दे चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्थान, दीमापुर, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, नार्थ ईस्ट, श्रीनगर, अलीगढ़ समेत विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

राष्ट्रपति पुरस्कार से हो चुके हैं सम्मानित
सीआरपीएफ में सेवाएं देते हुए ध्यानी अपनी ईमानदार और बेदाग छवि के लिए जाने जाते हैं। जिसके चलते उन्हें उत्क्रष्ट सेवाओं के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद के हाथों राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय पुलिस मेडल, 7 बार बल के डीजी डिस्क, 14 प्रशस्तिपत्र और 5 प्रशंसा पत्रों से नवाजा जा चुका है।

वर्तमान में वह आईजी देहरादून सेक्टर में कमाण्डेंट प्रशासन के पद पर तैनात हैं। अनिल कुमार ध्यानी 2013 से 2016 तक रामघाट रोड स्थित आरएएफ 104 बटालियन के कमांडेंट रहे हैं। इसके बाद से उनका परिवार अलीगढ़ में ही रह रहा है। जबकि कमाण्डेंट ध्यानी का जन्म उत्तराखण्ड के पौढी गढवाल जिले में हुआ है।

नक्सलियों से लिया लोहा : अनिल ध्यानी ने वर्ष 2010 से 2013 तक छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र बक्सर में कमांडेंट पद पर तैनात रहे। वहां नक्सलवादियों से कई बार मुठभेड़ हुई, जिसमें कई नक्सलवादियों को ढेर कर दिया । अपने जवानों की हौसला अफजाई करते हुए कई ऑपरेशन में सफलता प्राप्त की।

अमरनाथ यात्रा श्रद्धालुओं के बने सुरक्षा कवच : जम्मू कश्मीर के गंदरबल घुंड स्थित 118 बटालियन के कमांडेंट के रूप में अनिल कुमार ध्यानी वर्ष 2016 में कार्य किया। अपनी तैनाती की शुरुआत में है दुश्मन से साहस से मुकाबले के लिए डीजी सीआरपीएफ मुख्यालय में सुर्खियां बटोरी। इसके बाद केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा कवच की जिम्मेदारी अनिल कुमार ध्यानी को सौंपी ।

जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान श्रीनगर के लाल चौक पर आतंकवादी और पत्थरबाजों ने श्रद्धालुओं से भरी बस पर हमला किया था। इस दौरान अनिल कुमार ध्यानी ने कमांडो के साथ ऑपरेशन चलाया। कई आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। अनुभव और कुशल नेतृत्व के चलते 2016 से 2021 तक गंधर्व घुंड 118 बटालियन की कमांड सौंपी गई। अमरनाथ यात्रा के लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा कराने का श्रेय जाता है।

शांतिदूत की भूमिका में रहे ध्यानीः कमाण्डेंट ध्यानी ने देश की सरहदों की सुरक्षा के साथ ही धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कवच के रूप में जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। समय समय पर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी मास्टरमाइंड की भूमिका में जाने जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर में जब दंगे हुए तब उन्हें शांति दूत के रूप में भेजा गया। वहा उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए बिगड़े माहौल को संभाला। जाट आंदोलन के दौरान, अलीगढ़ में तैनाती के दौरान कई बार धधकते अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं ऊपरकोट पर हुए साम्प्रदायिक दंगों में प्रशासन के साथ मिलकर शांति व्यवस्था कायम कराने में अहम भूमिका निभाई।

पुरस्कारों की लम्बी फेहरिस्त : अनिल कुमार ध्यानी को जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की सेवाओं के दौरान सात बार बल के महानिदेशक द्वारा डीजी डिस्क एवं प्रशस्ति पत्र से नवाजा गया। दो बार जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक डिस्क और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार उन्हें जम्मू कश्मीर में हुए लोकसभा, विधानसभा एवं ग्राम सभा के चुनाव शांतिपूर्वक कराने के लिए दिया गया। जम्मू कश्मीर में धारा-370 समाप्त किये जाने के बाद आतंकवादियों और पत्थरबाजों पर नकेल कसने के लिए देश के चुनिंदा अफसरों की तैनाती की गई थी जिसमें सबसे पहले अनिल कुमार ध्यानी को भेजा गया। जम्मू कश्मीर में 6 वर्षों से अधिक तैनात रहे है।

शुभ चिंतकों में खुशी की लहरः कमाण्डेट ध्यानी को बेदाग छवि , अनुशासन और उत्कृष्ठ कार्य के लिए शुभ चिंतकों में खुशी की लहर है। जन्म स्थली पौढी गढवाल में रह रहे परिजनों और अलीगढ़ के रह रहे मित्रों, राजपत्रित अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों आदि द्वारा उन्हें इस उपलब्धि के लिए शुभ कामनाएं दी जा रही है।