AIMIM Asaduddin Owaisi के सामने Atique Ahmed के बेटे Mohammad Ali का पहला भाषण, शहीद हो गया तो, आंसू ना बहाना

Mohammad Ali जो कि Atique Ahmed  के बेटे हैं

उन्होंने अपने पहले भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि,आपका कल का बच्चा आज यहां आपके सामने मंच पर आकर सियासी भाषण दे रहा है। मुझे थोड़ी सी झींझक थी कि जहां पर इतने बड़ेबड़े सियासी और मेरे बड़े बुजुर्ग मौजूद हैवहां कल का बच्चा क्या भाषण देगा। 

लेकिन आप सभी को पता है कि सियासी घर में मेरी परवरिश हुई हैमैं एक स्टूडेंट हूं लेकिन मेरे रगों में भी वही खून वही हौसलाताकत और जज्बात है।  

एक बहुत जरूरी बात जो मैं इतने दिनों से देख रहा हूं और मेरे अब्बा भी यही बोलते हैं किउन्होंने अपनी जिंदगी में एक ऐसा लीडर नहीं देखा जो इतना अपडेट रहने वाला हो।

 जब से अब्बा गुजरात जेल में आए हैतब से उन्होंने मुझसे सिर्फ दो ही चीज  मंगवाई है  पहली Ertugrul की Series और दूसरी Owaisi साहब की Speeches  

मैंने Owaisi साहब की speech को सुना तो एहसास हुआ किहम आज तकगे जा रहे हैं और हम से सिर्फ झूठ बोला जा रहा हैहमने और हमारे बाप दादा ने इतने सालों तक इनको वोट दिया है।

अगर आज हम खुद के लिए वही वोट मांगने का काम कर रहे हैं तोक्या जुल्म कर रहे हैं 

अगर हमारे साथ हिंदूमुस्लिमसिख भाई सब हैउनको यह पार्टी मौका देने की और सबको साथ में चलने की बात करती है। हम अपना हक मांगते हैं तो क्या गलत कर रहे हैं।  

UP और हिंदुस्तान के अलगअलग जगह पर हमको 

तो वोट कटवा कहते हैं।

 BJP और RSS के लोगो ने तो हमको कटवा कटवा  कह के अपनी सरकार बनाई है सेंट्रल मेंअब यह UP में वोट कटवा करके सरकार बनाने चाहते हैं।

 वोट कटवा कहे जाने पर हमें कोई शर्म नहीं आतीलेकिन जब इसमें हमारे अपने भी शामिल हो जाते हैं तब हमें बहुत तकलीफ होती है।  

100 में से 22 फ़ीसदी हम हैंकोई 7 है, 8 है तो कोई 10 है। वोट का समंदर हम हैतो वोट की नदी और नाले वह है।

कभी समुंदर को नदी और नाले रास्ते नहीं दिखातेबल्कि यह आकर समंदर में मिलते हैं।  

कौन होगा हमसे बड़ा देशभक्त, हमारे पास मौका थाहम चाहते तो जा सकते थेपर हम यहां रुके। हम उनमें से नहीं जो कराची चले गएहमारे बाप दादा चाहते तो चले जाते पर वो रुके और यहां हमारी  पुश्ते दफन है। 

यह हमारी वफादारी की सबूत मांगते हैंइनको हम बता दें कि जरूरत पड़ने पर इस मिट्टी के लिए हम कुर्बानी देने को भी तैयार है।

 हमारा मजहब यही सिखाता है कि जहां रहो वही के लिए वफादार रहना जरूरी है। वह हम को तोड़ना चाहते हैंयह चाहे कुछ भी कर ले हमारी हिम्मत टूटने वाली नहीं है।  

मैंने अपनी मां से कहा कि मेरे अब्बा ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और आप उनको 26 साल से जेल में ही देख रही है। चाचा और बड़े बेटे भी जेल में ही हैअगर कल को मैं इस लड़ाई में शहीद हो गया तोआंसू ना बहाना। तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे बाद मेरे तीन बेटे और है।  

अब बस जरूरत यह है कि दलाल बाज़ी ना की जाएअगर झंडा उठाना ही है तो अपना झंडा उठाएअगर बात करनी ही है तो अपनी बात की जाए।

अगर हमारे साथ हक पर चलने वाले लोग हर तरीके से जुड़ने को तैयार है तोहम वह लोग हैं जो हक के लिए जान दे सकते है।

 आज के बाद ऐसा करें कि कोई नेता हम से यह ना बोले कि जाओ हमारे लिए काम करोवह नेता यह  कहे कि हमारे साथ जुडो और काम करो। आप से गुजारिश है कि इस संगठन को मजबूत करिए। 

By :- Kriti Raj Sinha