विजयादशमी एक यात्रा है – अंधकार से प्रकाश की ओर, अंतिम दिन विजय का होता है, जब सत्य की जीत हुई।,

विजयादशमी एक यात्रा हैअंधकार से प्रकाश की ओर, अंतिम दिन विजय का होता है, जब सत्य की जीत हुई। यह जीत किसी से लड़ कर हासिल नहीं हुई, बल्कि आपके जागरूक होने के कारण हुई। 

 

शारदीय नवरात्रि आश्विन माह की शुक्ल पक्ष के पहले दिन से लेकर विजयदशमी यानी की 10 दिन तक मां शक्ति के सभी अवतार की पूजा की जाती है। जिसे महानवरात्रि और विजयादशमी दोनों ही बोला जाता है। 

         क्या आप सभी को इस बात की जानकारी है कि हम नवरात्रि और विजयादशमी दोनों एक साथ क्यों मनाते है, शायद कुछ लोगों को पता भी हो, और कुछ लोगों को नहीं भी। तो, आइए थोड़ी अपनी जानकारी को update करते है। नवरात्रि में मां भगवती के सभी नौ रूपों की पूजा अलग-अलग दिन की जाती है। दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके अच्छाई पे बुराई की जीत दिलाई। और ठीक इसी शरद माह के दशमी को भगवान् पुरषोत्तम राम ने रावण का वध करके असत्य पर सत्य की विजय दिलाई। और राम ने रावण के विनाश के लिए मां दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए चंडी पूजा भी की थी। 

फर्क इतना है ये दोनों ही अलग अलग युग में हुए थे, रावण का वध त्रेतायुग में हुआ था, और मां दुर्गा के स्वरूपों का उल्लेख कही भी स्वाभाविक रूप से नहीं है।  

 

भारत के कुछ राज्यों में इसका विशेष महत्व:

 

भारत के कुछ राज्यों में इसका विशेष महत्व है। दुर्गा पूजा के त्यौहार के दिन ओडिशा, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में बहुत ही धूम धाम से मनाते है। दुर्गा पूजा हिन्दुओं का महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। पर बंगाल की दुर्गा पूजा पूरे देश में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है क्योकि यह बंगालियों का प्रमुख त्यौहार होता है। वहां के लोग देवी दुर्गा को दुर्गोत्सनी अर्थात् बुराई की विनाशक और भक्तों की रक्षक के रुप में पूजा करते हैं। वही गुजरात में लोग देवी की पूजा के साथ साथ नौ दिन गरबा और डांडिया का भी विशेष आयोजन होता है।

मां के आर्शीवाद पाने के लोग लोग पूरे नौ दिनों का व्रत रखकर पूजा करते हैं। कुछ लोग केवल पहले और आखिरी दिन ही व्रत रखते हैं।

 

Navrartri भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो हमारे जीवन में नई सोच और ऊर्जा का संचार करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस साल हम सभी ही 15 October को विजयादशमी मनायेंगे। और साथ ही कोरोना जैसी महामारी को हमेशा के लिए दूर भगाएंगे।

 

“नौ दिनों की खास नहीं मौहताज़ नहीं… 

मैं शक्ति का नौ स्वरूप हूं…

हर दिन की सरताज और हकदार हूं…”

 

By: Tanwi Mishra

 

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