जामिया ने “ग्लोबल डिप्लोमेसी एंड रीजनल कोऑपरेशन: इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप इन बुद्धिस्ट हेरिटेज”पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की सह-मेज़बानी की; जेएमआई के रजिस्ट्रार, प्रो. रिज़वी ने दिया मुख्य वक्तव्य
“ग्लोबल डिप्लोमेसी एंड रीजनल कोऑपरेशन: इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप इन बुद्धिस्टहेरिटेज” पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेज़ोल्यूशन (NMCPCRC) जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI); लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल; त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल; मिड-वेस्ट विश्वविद्यालय नेपाल; साउथ एशिया फाउंडेशन नेपाल; नालंदा विश्वविद्यालय नालंदा बिहार; बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी उत्तर प्रदेश; एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे; सिद्धार्थ विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश द्वारा संयुक्त रूप से 30-31 जनवरी, 2026 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में किया गया। इस सम्मेलन में भारत, नेपाल, जापान और अन्य देशों के जाने-माने विद्वान, राजनयिक, नीति निर्माता, विश्वविद्यालय के लीडर्स और सांस्कृतिक कार्यकर्ता एक साथ आए। इस सम्मेलन ने बौद्ध धर्म को एक साझा सभ्यतागत विरासत और क्षेत्रीय सहयोग, शांति और सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक सेतु के रूप में खोजने के लिए एक उच्च-स्तरीय मंच प्रदान किया।

उद्घाटन सत्र में भारत और नेपाल के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ राजनयिक, राजदूत और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। जेएमआई के रजिस्ट्रार, प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने मुख्य वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल के बीच राजनयिक संवाद, क्षेत्रीय सहयोग और साझा सभ्यतागत मूल्यों के लिए एक सेतु के रूप में बौद्ध विरासत की स्थायी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जिससे विद्वानों, नीति निर्माताओं और अभ्यासकर्ताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बौद्ध विरासत को न केवल एक ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि दक्षिण एशिया में भविष्य की राजनयिक भागीदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को आकार देने के लिए एक जीवित संसाधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
सम्मेलन में सभ्यतागत संबंधों, सांस्कृतिक कूटनीति, शैक्षिक सहयोग, धार्मिक पर्यटन, सतत विकास, विरासत संरक्षण और युवा जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई विषयगत सत्र आयोजित किए गए। प्रोफेसर अबूजर खैरी, कार्यवाहक निदेशक, NMCPCR ने एक सेशन की सह-अध्यक्षता की और एजुकेशनल संबंधों के लिए क्षेत्रीय सहयोग का लाभ उठाने: भारत-नेपाल सहयोग विषय पर बात की। पैनल चर्चाओं में भारत और नेपाल के बीच एकेडमिक आदान-प्रदान, विरासत-आधारित शांति शिक्षा और सहयोगी अनुसंधान पहलों को मजबूत करने में विश्वविद्यालयों, बहुपक्षीय संस्थानों और क्षेत्रीय साझेदारियों की भूमिका पर चर्चा की गई।
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण परिणाम नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेज़ोल्यूशन जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली; लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल और साउथ एशिया फाउंडेशन नेपाल के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना था, जो बौद्ध और शांति अध्ययन, सांस्कृतिक अनुसंधान और विनिमय कार्यक्रम के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करता है। विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप “न्यू डेल्ही-लुम्बिनी डिकलेयरेशन” को भी अपनाया गया, जो शांति, क्षेत्रीय सहयोग, स्थायी पर्यटन और अंतर-सांस्कृतिक समझ के लिए एक आधार के रूप में बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक साझा दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करता है।
सम्मेलन का समापन जेएमआई के रजिस्ट्रार, प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी, जेएमआई द्वारा सांस्कृतिक कूटनीति, शिक्षा और विरासत-आधारित विकास के माध्यम से भारत-नेपाल सहयोग को सुदृढ करने, सकारात्मक शांति, जिम्मेदार कूटनीति और क्षेत्रीय सद्भाव के विचार की पुष्टि करने पर दिए गए वक्तव्यों के साथ हुआ। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेज़ोल्यूशन जामिया मिलिया इस्लामिया के संकाय सदस्यों- प्रो. राजीव नयन, प्रो. कौशिकी, प्रो. असलम खान, डॉ. बिनिश मरियम और श्री सुधांशु त्रिवेदी ने भाग लिया।