अलीगढ़ में मीट व्यापारियों पर बढ़ती भीड़ हिंसा पर चिंता, कैमरा निगरानी व सख़्त कार्रवाई की मांग

अलीगढ़, 30 दिसंबर। अलीगढ़ जनपद में मीट व्यापार से जुड़े वैध लाइसेंसधारी छोटे व्यापारियों और श्रमिकों के साथ हो रही भीड़ हिंसा की घटनाओं को लेकर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनप्रतिनिधि संगठनों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में संगठनों की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एवं जिला प्रशासन को संयुक्त ज्ञापन भेजा गया।

ज्ञापन में कहा गया कि हाल के महीनों में मीट व्यापार से जुड़े लोगों को केवल संदेह के आधार पर निशाना बनाया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन है। 24–25 मई 2025 को थाना हरदुआगंज क्षेत्र के ग्राम अलहदादपुर में चार लाइसेंसधारी व्यापारियों पर हुई हिंसा तथा 21 दिसंबर 2025 को व्यापारी शरीफ़ कुरैशी के साथ मारपीट की घटनाओं का उल्लेख किया गया। एफएसएल रिपोर्ट में मांस के वैध (भैंस) होने की पुष्टि के बावजूद कानून हाथ में लिया जाना चिंताजनक बताया गया।

संगठनों ने मांग की कि ऐसी घटनाओं को मोब लिंचिंग मानते हुए दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को कम से कम ₹5 लाख मुआवज़ा दिया जाए। साथ ही मीट फैक्ट्रियों व कटान स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे और मिनी कंट्रोल रूम स्थापित करने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह पहल संविधान, कानून के शासन और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए है।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक एवं बहुजन कल्याण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष यूनुस खान चौधरी (वाई.के. चौधरी), एआईएमआईएम अलीगढ़ के ज़िला अध्यक्ष व पूर्व पार्षद यामीन खान अब्बासी और महानगर अध्यक्ष व पूर्व पार्षद बुंदू खान मौजूद रहे। सभी प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून हाथ में लेने की घटनाएँ समाज और संविधान दोनों के लिए ख़तरा हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है।

इस विषय पर कुछ अन्य सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी पूर्व में अपनी सहमति और समर्थन जताया था, हालांकि व्यस्तता अथवा अन्य कारणों से वे कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। इनमें शकुंतला भारती (पूर्व मेयर, अलीगढ़), धर्मा भैया (जिला मंत्री, विश्व हिंदू परिषद), हरि ओम (बजरंग दल) और परचम पार्टी के नजीम इलाही शामिल हैं।

प्रेस के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम में रखे गए विचार और ज्ञापन की प्रस्तुति उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा की गई, जबकि इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता और समर्थन व्यापक रूप से मौजूद है।

यूनुस खान चौधरी (वाई.के. चौधरी) का बयान
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अल्पसंख्यक एवं बहुजन कल्याण संघ

अलीगढ़ जनपद में संचालित मीट फैक्ट्रियों के कानूनी एवं अवैध संचालन की निष्पक्ष जाँच अत्यंत आवश्यक है। यदि कोई इकाई बिना वैध लाइसेंस या नियमों के विपरीत कार्य कर रही है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। अवैध संचालन के कारण उत्पन्न होने वाली अफ़वाहें और तनाव अक्सर भीड़ हिंसा (Mob Violence) का रूप ले लेती हैं, जिसका खामियाज़ा छोटे, वैध मीट व्यापारियों और मज़दूरों को भुगतना पड़ता है।

हम प्रशासन से मांग करते हैं कि नजदीकी थाना एवं पुलिस चौकी स्तर पर सीसीटीवी निगरानी तथा मिनी कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जाँच क़ानूनी प्रक्रिया के तहत हो सके, न कि भीड़ द्वारा कानून हाथ में लिया जाए। कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है।

यामीन खान अब्बासी का बयान
पूर्व पार्षद, ज़िला अध्यक्ष, एआईएमआईएम अलीगढ़

अलीगढ़ में मीट फैक्ट्रियों के संचालन को लेकर पारदर्शिता की भारी कमी दिखाई दे रही है। यदि प्रशासन समय रहते कानूनी और अवैध इकाइयों में स्पष्ट अंतर कर सख़्त कार्रवाई करे, तो भीड़ हिंसा जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति या व्यापार को निशाना बनाना संविधान और कानून दोनों के ख़िलाफ़ है।
हमारी मांग है कि प्रशासन अवैध मीट इकाइयों पर कठोर कार्रवाई करे और वैध व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान करे। साथ ही, नजदीकी पुलिस चौकियों पर सीसीटीवी निगरानी और मिनी कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएँ, ताकि किसी भी शिकायत या संदेह की जाँच तत्काल और क़ानूनी ढंग से हो सके।

बुंदू खान का बयान
पूर्व पार्षद, महानगर अध्यक्ष, एआईएमआईएम अलीगढ़

मीट फैक्ट्रियों के संचालन में लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी की कमी के कारण शहर का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। अवैध इकाइयों पर कार्रवाई न होने से भ्रम और अफ़वाहें फैलती हैं, जिसका परिणाम भीड़ हिंसा के रूप में सामने आता है। इसका नुकसान निर्दोष और लाइसेंसधारी छोटे व्यापारियों को उठाना पड़ता है।
हम मांग करते हैं कि प्रशासन सभी मीट फैक्ट्रियों की नियमित जाँच करे, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करे और हर संवेदनशील क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे व मिनी कंट्रोल रूम स्थापित करे। इससे कानून-व्यवस्था मज़बूत होगी और जनता का भरोसा बहाल होगा।

सहमति के बाद नहीं हुए शामिल

इस पूरे विषय पर यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अवैध रूप से संचालित मीट फैक्ट्रियों के विरुद्ध कार्रवाई की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी। यह सहमति इस बात का संकेत है कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने को लेकर व्यापक स्तर पर साझा चिंता मौजूद है।

हालांकि, कुछ प्रतिनिधि विभिन्न कारणों से कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। इसे नकारात्मक रूप में देखने के बजाय इसे इस तरह समझा जाना चाहिए कि यह मुद्दा किसी एक संगठन या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक सामाजिक चिंता है, जिस पर अलग-अलग मंचों से सहमति और समर्थन व्यक्त किया जा रहा है।