Delhi News: हामिद अंसारी के बयान पर सियासी विवाद, योगी आदित्यनाथ और ओवैसी की प्रतिक्रिया सामने आई
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। 18 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित A.G. Noorani Memorial Lecture में अंसारी ने दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का हवाला दिया।
हामिद अंसारी ने क्या कहा?
अंसारी ने नूरानी की किताब के परिचय में दर्ज जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक टिप्पणी का उल्लेख किया। उनके अनुसार, तत्कालीन विदेश सचिव गुंडेविया ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में नेहरू की बात दर्ज की थी।
अंसारी ने उसी संदर्भ में कहा कि भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि “हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता” है। उन्होंने नूरानी के लेखन के हवाले से भारत में नागरिक राष्ट्रवाद से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बदलाव से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया।
योगी आदित्यनाथ ने की आलोचना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बयान भारत, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के खिलाफ है तथा इससे भारत की छवि प्रभावित करने की कोशिशों को बढ़ावा मिलता है।
योगी ने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है।
बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन ने अंसारी से माफी मांगने की मांग की, जबकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने टिप्पणी को अनुपयुक्त और अस्वीकार्य बताया।
ओवैसी ने किया हामिद अंसारी का बचाव
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अंसारी का बचाव करते हुए उन्हें विद्वान बताया। उन्होंने कहा कि अंसारी की बातों से असहमति हो सकती है, लेकिन उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
वहीं AIMIM नेता वारिस पठान ने अंसारी की टिप्पणी के संदर्भ में बीजेपी पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के आरोप लगाए। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं।
अन्य प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने भी अंसारी के बयान की आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे देश का माहौल खराब हो सकता है।
इस बीच, अन्य रिपोर्टों में भी बीजेपी और कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं की ओर से अंसारी की टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
विवाद का केंद्र क्या है?
विवाद मुख्य रूप से उस ऐतिहासिक टिप्पणी के इस्तेमाल को लेकर है जिसे अंसारी ने ए.जी. नूरानी की किताब के हवाले से पेश किया। अंसारी ने इसे वर्तमान भारत में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच बहस के संदर्भ में रखा, जबकि बीजेपी नेताओं ने इसे हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी के रूप में लिया।
आपकी राय में इस विवाद में सबसे अहम मुद्दा ऐतिहासिक बयान का संदर्भ है या उसका मौजूदा राजनीतिक इस्तेमाल?