MLC Election Results 2026: 28 सीटों में NDA को 16, SP को 5; कांग्रेस को सिर्फ 1

MLC Election Results 2026: 28 सीटों पर चुनाव, NDA को 16, SP को 5 सीटें; कांग्रेस को सिर्फ एक पर जीत

नई दिल्ली: देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों ने कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों और दलों की रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है। 23 अक्टूबर 2026 को इन चार राज्यों की विधान परिषदों की 28 सीटों पर मतदान हुआ था। मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई और अलग-अलग सीटों के परिणाम 28 से 29 अक्टूबर तक सामने आए।

इन चुनावों में NDA के घटक दलों ने कुल 16 सीटें जीतीं। समाजवादी पार्टी (SP) को 5, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को 2, जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज पार्टी को एक-एक सीट मिली। बिहार में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि चार राज्यों में हुए इन मुकाबलों में स्नातक और शिक्षक मतदाता शामिल थे। इनका मतदान लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह आम मतदाताओं के सीधे मतदान से अलग होता है।

चार राज्यों में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

28 सीटों के परिणामों का दलवार विवरण इस प्रकार है:

पार्टी/गठबंधन जीती गई सीटें
NDA के घटक दल 16
समाजवादी पार्टी (SP) 5
NCP (शरदचंद्र पवार) 2
कांग्रेस 1
RJD 1
जन सुराज पार्टी 1
निर्दलीय 2
कुल 28

NDA की 16 सीटों में BJP, JD(U), JD(S) और महाराष्ट्र में शिवसेना के खाते की सीटें शामिल हैं। इसे किसी एक पार्टी का बहुमत नहीं समझना चाहिए। यह चार राज्यों की 28 सीटों पर हुए चुनाव का संयुक्त गठबंधन आंकड़ा है।

उत्तर प्रदेश: BJP को 6 और SP को 5 सीटें

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। परिणामों में BJP ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं।

BJP की जीती हुई सीटें:

  • आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – Manvendra Pratap Singh
  • बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Hari Singh Dhillon
  • लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Umesh Dwivedi
  • मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Shri Chand Sharma
  • मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – Dinesh Kumar Goyal
  • गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Dhruv Kumar Tripathi

समाजवादी पार्टी की जीती हुई सीटें:

  • इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – Man Singh Yadav
  • लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – Kanti Singh
  • वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – Ashutosh Sinha
  • वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Lal Bihari Yadav
  • आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Akash Agarwal

सबसे चर्चित मुकाबलों में लखनऊ और वाराणसी स्नातक सीटें रहीं। लखनऊ में SP की Kanti Singh ने BJP के मौजूदा MLC Avaneesh Kumar Singh को हराया। Kanti Singh को 56,905 वोट मिले, जबकि Avaneesh Kumar Singh को 39,778 वोट प्राप्त हुए।

वाराणसी स्नातक सीट पर SP के Ashutosh Sinha ने BJP के Kedar Nath Singh को हराया। Ashutosh Sinha को 55,046 वोट मिले।

वाराणसी प्रधानमंत्री Narendra Modi का लोकसभा क्षेत्र है। यहां BJP की दोनों सीटें हारने के बाद चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।

बिहार: Jan Suraaj ने खोला विधान परिषद में खाता

बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। यहां BJP ने तीन, JD(U) ने एक, RJD ने एक और Jan Suraaj Party ने एक सीट जीती। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

बिहार के प्रमुख परिणाम इस प्रकार रहे:

  • दरभंगा शिक्षक: Jan Suraaj के Suresh Prasad Rai ने कांग्रेस के मौजूदा MLC Madan Mohan Jha को 324 वोटों से हराया। इसके साथ ही Jan Suraaj ने विधान परिषद में अपना पहला खाता खोला।
  • तिरहुत शिक्षक: BJP के Narendra Prasad Singh ने जीत दर्ज की।
  • पटना शिक्षक: RJD के Sanjeev Kumar ने BJP के पांच बार के MLC रहे Nawal Kishore Yadav को हराया।
  • सारण शिक्षक: निर्दलीय Rahul Raj ने मौजूदा MLC Afaq Ahmed को हराया।
  • पटना स्नातक: JD(U) के Neeraj Kumar ने लगातार चौथी बार सीट बरकरार रखी।
  • दरभंगा स्नातक: BJP के Sarvesh Kumar विजयी रहे।
  • कोसी स्नातक: BJP के N K Yadav ने जीत दर्ज की।
  • तिरहुत स्नातक: निर्दलीय Bansi Dhar Brajwasi ने सीट बरकरार रखी।

बिहार में Jan Suraaj की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उसे विधान परिषद में पहली बार प्रतिनिधित्व मिला।

कर्नाटक: BJP-JD(S) गठबंधन ने चारों सीटें जीतीं

कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के लिए चुनाव हुआ। यहां BJP और JD(S) गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। BJP ने तीन और JD(S) ने एक सीट जीती।

  • उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – Shashil G Namoshi (BJP)
  • दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – K M Suresh (BJP)
  • पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – S V Sankanur (BJP)
  • बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – A P Ranganath (JD-S)

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर JD(S) के A P Ranganath ने कांग्रेस के मौजूदा MLC Puttanna को 908 वोटों से हराया। Ranganath को 10,810 और Puttanna को 9,902 वोट मिले।

कर्नाटक में कांग्रेस की एक भी सीट नहीं आई। यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और BJP-JD(S) विपक्षी गठबंधन के रूप में चुनाव मैदान में थे।

महाराष्ट्र: विपक्षी गठबंधन ने 3 और महायुति ने 2 सीटें जीतीं

महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों पर चुनाव हुआ। यहां सत्तारूढ़ महायुति को दो और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) को तीन सीटें मिलीं।

  • नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – कांग्रेस के Abhijeet Wanjari ने BJP के Sudhakar Kohale को 3,271 वोटों से हराया। Wanjari को 67,231 और Kohale को 63,960 वोट मिले।
  • अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – शिवसेना के Kiran Sarnaik विजयी रहे।
  • पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – BJP के Kaustubh Gawade ने जीत दर्ज की।
  • पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – NCP (शरदचंद्र पवार) की Harshada Deshmukh-Jadhav विजयी रहीं।
  • छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – NCP (शरदचंद्र पवार) के Pratapsinh Patil ने जीत दर्ज की।

नागपुर की सीट पर कांग्रेस की जीत को BJP के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण झटका माना गया। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय है। यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari का गृह क्षेत्र भी है।

MLC Election Results 2026 – State-wise Results

MLC चुनाव कैसे होता है और आम जनता इसमें वोट क्यों नहीं डालती?

MLC का पूरा नाम Member of Legislative Council है। यह राज्य की विधान परिषद का सदस्य होता है। विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है, जबकि विधानसभा निचला सदन है।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों के चयन के पांच रास्ते हैं:

  1. स्थानीय निकाय: लगभग एक-तिहाई सदस्य नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और अन्य निर्धारित स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं।
  2. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: लगभग एक-बारहवां हिस्सा ऐसे पंजीकृत मतदाताओं द्वारा चुना जाता है, जो निर्धारित शर्तों के अनुसार कम-से-कम तीन वर्ष से स्नातक हों।
  3. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: लगभग एक-बारहवां हिस्सा निर्धारित शैक्षणिक संस्थानों में कम-से-कम तीन साल से पढ़ा रहे पात्र और पंजीकृत शिक्षकों द्वारा चुना जाता है।
  4. विधायक कोटे से: लगभग एक-तिहाई सदस्य विधानसभा के विधायक चुनते हैं।
  5. राज्यपाल द्वारा मनोनयन: शेष सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले लोगों में से राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

इन चुनावों में मतदाता संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की श्रेणी के अनुसार तय होते हैं। इसलिए स्नातक सीट पर सामान्य मतदाता नहीं, बल्कि पंजीकृत पात्र स्नातक वोट डालते हैं। शिक्षक सीट पर पात्र और पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और Single Transferable Vote (एकल संक्रमणीय मत) प्रणाली से होते हैं। इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता के क्रम में वोट देते हैं। इस बार चारों राज्यों में इन सीटों पर मतदान बैलेट पेपर से कराया गया।

MLC का महत्व क्या है? विधान परिषद के पास कितनी शक्ति होती है?

विधान परिषद को राज्य की दूसरी सदन या Upper House कहा जाता है। इसका उद्देश्य विधायी प्रक्रिया में अतिरिक्त चर्चा, समीक्षा और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों को प्रतिनिधित्व देना है।

MLC सदन में विधेयकों पर चर्चा कर सकते हैं, सरकार से सवाल पूछ सकते हैं, जनहित के मुद्दे उठा सकते हैं और विधायी समितियों में हिस्सा ले सकते हैं।

हालांकि, विधान परिषद की शक्तियां विधानसभा से कम हैं। खासकर धन विधेयक (Money Bill) के मामले में विधान परिषद उसे रोक नहीं सकती। वह केवल सुझाव दे सकती है और संविधान के अनुसार सीमित अवधि तक उसे अपने पास रख सकती है।

MLC चुनावों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनमें शिक्षकों, स्नातकों और स्थानीय निकायों जैसे विशिष्ट मतदाता समूहों की पसंद सामने आती है। राजनीतिक दल इन नतीजों को अपने संगठन, उम्मीदवार चयन और स्थानीय समर्थन का आकलन करने के लिए देखते हैं।

लेकिन इन चुनावों को विधानसभा या लोकसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों का मतदाता वर्ग और चुनावी प्रक्रिया अलग होती है।

प्रधानमंत्री Modi ने कांग्रेस पर कसा तंज

MLC चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान हुआ था। नतीजों में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस पर तंज कसा।

उन्होंने लिखा:

“MLC elections in 28 seats across 4 big states – Uttar Pradesh, Maharashtra, Bihar and Karnataka. Elections held using ballot papers. Guess how many seats Congress won?”

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस की उस मांग के संदर्भ में देखा गया, जिसमें विपक्षी दल EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें भरोसा है कि EVM से चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं होते, तो उन्हें लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर से कराने की प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।

Yogi, Akhilesh और Keshav Maurya ने क्या कहा?

Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित सदस्य शिक्षकों और स्नातकों की आकांक्षाओं को आवाज देंगे, उनके हितों की रक्षा करेंगे और शिक्षा के विकास में योगदान देंगे।

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी प्रमुख ने अपनी पार्टी के विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। वाराणसी में मतगणना के दौरान उन्होंने प्रशासन पर दिल्ली और लखनऊ से विरोधाभासी दबाव होने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग से निष्पक्षता दिखाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जीत का संदेश शांतिपूर्ण तरीके से सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए।

Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि BJP को इससे अधिक सीटें जीतने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी। उनके बयान के अनुसार, “SP won where it should not have.” यानी समाजवादी पार्टी ने उन जगहों पर जीत हासिल की जहां BJP को उसकी जीत की उम्मीद नहीं थी।

Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री Om Prakash Rajbhar ने कहा कि MLC चुनाव का जनादेश शिक्षित मतदाताओं का है, आम जनता का नहीं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में यही मतदाता और आम मतदाता अलग-अलग तरीके से मतदान कर सकते हैं।

Yediyurappa और Ashwini Vaishnaw ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कर्नाटक में BJP-JD(S) गठबंधन की चारों सीटों पर जीत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री B S Yediyurappa ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में NDA की जीत कांग्रेस के ‘Vote Chori’ आरोपों के खिलाफ उदाहरण है। उन्होंने मुख्यमंत्री D K Shivakumar से इस्तीफे की मांग भी की।

केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने भी कर्नाटक के परिणामों का हवाला देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में बैलेट पेपर से चुनाव हुए और BJP ने चारों सीटें जीत लीं।

वहीं कर्नाटक BJP अध्यक्ष B Y Vijayendra और JD(S) नेता H D Kumaraswamy ने इसे कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका बताया। कांग्रेस ने नतीजों को स्वीकार करते हुए हार के कारणों की समीक्षा करने की बात कही।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कितना महत्वपूर्ण है यह परिणाम?

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में 11 MLC सीटों में BJP की छह और SP की पांच सीटों पर जीत को दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खास तौर पर वाराणसी और लखनऊ की स्नातक सीटों पर SP की जीत, BJP के लिए समीक्षा का विषय बन सकती है। वाराणसी प्रधानमंत्री Narendra Modi का संसदीय क्षेत्र है, जबकि लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी और राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।

हालांकि, MLC चुनावों में मतदाता केवल पंजीकृत स्नातक, शिक्षक या संबंधित श्रेणी के प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए इन नतीजों के आधार पर पूरे प्रदेश के मतदाताओं की पसंद या 2027 के विधानसभा चुनाव के परिणाम का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

चार राज्यों के इन चुनावों ने एक तरफ NDA को कुल 28 में से 16 सीटें दिलाईं, वहीं SP ने उत्तर प्रदेश में पांच सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति मजबूत की। बिहार में Jan Suraaj की पहली जीत और कर्नाटक में BJP-JD(S) की क्लीन स्वीप भी इन चुनावों के अहम राजनीतिक घटनाक्रम रहे।