मुरादाबाद में 19 महीने में 17 मुस्लिम युवतियों का धर्म परिवर्तन, फिर गैर-मुस्लिम युवकों से विवाह; आखिर कौन करा रहा है धर्म परिवर्तन?
मुरादाबाद। मुरादाबाद में पिछले 19 महीनों में 17 मुस्लिम युवतियों के कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कर हिंदू युवकों से शादी करने के मामले सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इन युवतियों का धर्म परिवर्तन कौन करा रहा है? क्या ये महज अलग-अलग प्रेम विवाह हैं या इन मामलों में कोई समान पैटर्न भी दिखाई देता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, धर्म परिवर्तन के बाद युवतियों ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। बताया गया है कि शादी के बाद इन दंपतियों के बीच कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया और वे अपना वैवाहिक जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि 19 महीने में 17 मामलों में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया आखिर कैसे हुई? क्या सभी युवतियां अपने स्तर पर यह फैसला ले रही थीं या उन्हें किसी व्यक्ति, संस्था अथवा समूह की ओर से प्रभावित किया गया?

क्या आर्य समाज की विवाह प्रक्रिया का इस्तेमाल हुआ?
इन मामलों में एक और सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है—क्या इन धर्म परिवर्तन और विवाहों में आर्य समाज की भूमिका रही है? अगर हां, तो कितने मामलों में और किस प्रक्रिया के तहत?
क्या प्रत्येक युवती ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन किया? क्या धर्म परिवर्तन से पहले और बाद की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई? इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और विवाह रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकते हैं।
क्या प्रेम विवाह या इसके पीछे कोई और कहानी?
पहले मामले में छजलैट क्षेत्र की सहरीन खातून अंसारी की अकबरपुर सिहाली निवासी गौरव से करीब पांच साल पहले मुलाकात हुई थी। बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया। अलग-अलग धर्म होने के कारण शादी में परेशानी आई और बाद में दोनों घर से चले गए।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने मंदिर में शादी की और इसके बाद साथ रह रहे हैं।
लेकिन यहां भी सवाल उठता है—क्या यह केवल एक व्यक्तिगत प्रेम कहानी थी या धर्म परिवर्तन की कोई ऐसी प्रक्रिया थी, जिसका हिस्सा यह विवाह बना?
दूसरे मामले में भी अलग धर्म के युवक-युवती
भोजपुर क्षेत्र के गौरव की मुलाकात ठाकुरद्वारा क्षेत्र की नूर फातिमा से हुई। बातचीत के बाद दोनों के बीच प्रेम संबंध बना और जुलाई में दोनों ने विवाह कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों शादी के बाद सामान्य वैवाहिक जीवन जी रहे हैं।
इस मामले में भी सवाल वही है—धर्म परिवर्तन का फैसला किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हुआ?
क्या युवतियों का ब्रेनवॉश किया गया?
17 मामलों की संख्या सामने आने के बाद यह सवाल भी उठाया जा सकता है कि क्या इन युवतियों को किसी तरह प्रभावित या ब्रेनवॉश किया गया था? या फिर सभी ने पूरी तरह अपनी इच्छा और समझ के आधार पर धर्म परिवर्तन और विवाह का फैसला लिया?
इस सवाल का जवाब बिना संबंधित महिलाओं के बयान, दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के नहीं दिया जा सकता।
19 महीने में 17 मामले, जांच से ही सामने आएगा सच
एक के बाद एक सामने आए इन मामलों ने धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। कौन धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करा रहा है? विवाह कहां हो रहे हैं? क्या किसी संस्था की भूमिका है? क्या सभी मामलों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई गई? और सबसे अहम—क्या इन महिलाओं ने बिना किसी दबाव के अपने फैसले लिए?
इन सवालों की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये अलग-अलग प्रेम विवाह हैं या इनके पीछे कोई समान पैटर्न मौजूद है।