विश्राम राय और रामबचन यादव की स्मृति में पदयात्रा, ‘हमारा गांव, हमारा सवाल’ अभियान के जरिए सरकार से पूछेंगे सवाल

विश्राम राय और रामबचन यादव की स्मृति में निकलेगी पदयात्रा

हमारा गांव, हमारा सवाल पदयात्रा किसानों मजदूरों नौजवानों से संवाद करेगी

सोशलिस्ट नेता विश्राम राय और रामबचन यादव की स्मृति में पदयात्रा कल सुबह 9:00 बजे से बाबू विश्राम राय की जन्मस्थली बीबीपुर से शुरू होगी। हमारा गांव, हमारा सवाल अभियान के तहत सरकार से जनता सवाल पूछेगी।

सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव विरेंद्र यादव ने कहा कि समाजवादी चिंतक बाबू विश्राम राय और रामबचन यादव की स्मृति में कल पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा।

किसान नेताओं ने कहा कि एक तरफ हम समाजवादी नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों, जनवादी लेखकों और साहित्यकारों को याद करेंगे। दूसरी तरफ हमारा गांव, हमारा सवाल अभियान के माध्यम से जमीनी हकीकत को सरकार के सामने रखेंगे।

हमारे मुद्दे-

  1. सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की बदहाली
  2. प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों में लूट
  3. जर्जर सड़कों और ब्लॉक तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार
  4. देश में समान शिक्षा लागू करने की मांग
  5. नौजवानों को रोजगार देने की मांग
  6. फसलों पर मिलने वाली एमएसपी को कानून के दायरे में लाकर कानून बनाने की मांग
  7. महंगाई की मार को देखते हुए धान और गेहूं का समर्थन मूल्य ₹6000 प्रति कुंतल व गन्ने का मूल्य ₹1000 प्रति कुंतल घोषित करने की मांग।
  8. नहरों से खेत तक पानी पहुंचाने की गारंटी की मांग।
  9. साधन सहकारी समिति और किसान सेवा केंद्र पर खाद बीज कीटनाशक की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता की मांग।
  10. धान क्रय केंद्र हर हाल में 1 नवंबर से चालू किया जाए।

पदयात्रा प्रमुख नारे

अमीर हो या गरीब की संतान सबको शिक्षा एक समान।
राष्ट्रपति का बेटा हो या चपरासी की संतान सबको शिक्षा एक समान।
रोजगार नहीं तो सरकार नहीं।
जब तक दुखी किसान रहेगा धरती पर तूफान रहेगा।
कौन बनाता हिंदुस्तान भारत का मजदूर किसान।
जबरिया भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाओ।
जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी।

किसान नेताओं ने कहा कि यह पदयात्रा सड़कों पर संवाद करते हुए आगे बढ़ेगी। हम गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और उन सवालों को सरकार तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, किसानों और मजदूरों से अपील की कि वे इस यात्रा से जुड़ें और हमारा गांव हमारा सवाल के संकल्प को मजबूत बनाएं।