Saharanpur News: मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर सियासत तेज, AIMIM ने अखिलेश यादव और इकरा हसन पर साधा निशाना
सहारनपुर: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर हुए बुलडोजर एक्शन के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर अब समाजवादी पार्टी (SP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच भी राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कैराना सांसद इकरा हसन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
AIMIM ने अखिलेश यादव से पूछा- 37 सांसद और 100 विधायक कहां हैं?
शादाब चौहान ने सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के पास उत्तर प्रदेश में 37 सांसद और 100 विधायक हैं। उनके मुताबिक, जब सहारनपुर में मस्जिद पर कार्रवाई हुई और मुस्लिम समुदाय के सामने संकट की स्थिति बनी, तो सपा के ये जनप्रतिनिधि कहां हैं।
उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या वह अपने सांसदों और विधायकों के साथ सहारनपुर पहुंचेंगे या फिर केवल बयानबाजी तक सीमित रहेंगे।
AIMIM प्रवक्ता ने इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी की भूमिका और उसकी राजनीतिक गंभीरता पर भी सवाल उठाए। उनके बयान के मुताबिक, पार्टी लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन हासिल करती रही है, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर उसकी सक्रियता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इकरा हसन पर भी शादाब चौहान का हमला
AIMIM प्रवक्ता ने कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को भी निशाने पर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासनिक दावे के अनुसार इकरा हसन जब सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया था।
इसी संदर्भ में शादाब चौहान ने सोशल मीडिया पर बयान देने और जमीन पर आंदोलन करने के बीच अंतर बताते हुए इकरा हसन की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने तंज कसते हुए उन्हें ‘रील मास्टर’ कहा और जमीन पर उतरकर लोगों के साथ खड़े होने की बात कही।
UP Election 2027 से पहले मुस्लिम राजनीति पर नजर
सहारनपुर मस्जिद विवाद का राजनीतिक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक देखा जा रहा है। UP Election 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और AIMIM के बीच मुस्लिम मतदाताओं को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
रिपोर्ट में कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों को मुस्लिम मतदाताओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है। AIMIM की कोशिश सपा के मुस्लिम वोट आधार को चुनौती देने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि AIMIM प्रवक्ता के बयान राजनीतिक आरोप और सवाल हैं। इन बयानों से अलग, सहारनपुर मस्जिद मामले में प्रशासन और संबंधित पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ आधिकारिक तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी होगा।