Saharanpur News मस्जिद मामले में HC सख्त, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक

Saharanpur मस्जिद मामले में इलाहाबाद HC का बड़ा आदेश, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर रोक

सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, याची से ₹6.41 करोड़ से अधिक के हर्जाने की वसूली पर रोक लगा दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।

मुतवल्ली ने दाखिल की याचिका

यह आदेश मस्जिद के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दाखिल याचिका पर दिया गया। याचिका में सिटी मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बेदखली के साथ ₹6.41 करोड़ से अधिक का हर्जाना लगाया गया था।

याचिका में 16 जुलाई 2026 के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के अलावा 2 सितंबर 2026 को जिला जज द्वारा अपील खारिज किए जाने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और कलेक्ट्रेट परिसर मस्जिद के प्रबंधक मौलवी अब्दुल हमीद को प्रतिवादी बनाया गया है।

Saharanpur Mosque Demolition Case में Allahabad High Court का आदेश

जमीन के रिकॉर्ड को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलील

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने अदालत में दलील दी कि बेदखली और हर्जाने से जुड़े दोनों आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किए गए। उन्होंने कहा कि संपत्ति के मालिकाना हक की पर्याप्त जांच नहीं की गई और 1956 के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नामों को फर्जी बताते हुए नजरअंदाज किया गया।

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध किया। सरकार का कहना था कि याची के दावे में विरोधाभास है—एक ओर जमीन को जमींदार की बताया जा रहा है और दूसरी ओर उसे वक्फ संपत्ति बताया गया है। सरकार के मुताबिक वक्फ को जमीन समर्पित किए जाने का कोई प्रमाण नहीं है और रिकॉर्ड में जमीन कलेक्ट्रेट कचहरी के नाम दर्ज है।

5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद Demolation की थी

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सिटी मजिस्ट्रेट ने बेदखली का आदेश दिया था और कथित अवैध कब्जे के एवज में ₹6.41 करोड़ से अधिक का हर्जाना लगाया था। जिला जज द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 की तड़के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में राज्य सरकार को अपना पक्ष हलफनामे के जरिए रखना होगा। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।