ईरान पर हमलों को तुर्की ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, एर्दोगन बोले– जंग नहीं, कूटनीति समाधान

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यिप एर्दोगन ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन” बताया है। 2 मार्च को दिए गए अपने बयान में एर्दोगन ने कहा कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है और इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

तुर्की, जो NATO का सदस्य है, ने साफ किया कि मौजूदा संकट का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि कूटनीतिक बातचीत से निकाला जाना चाहिए।

एर्दोगन ने दावा किया कि अंकारा पिछले कई हफ्तों से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद की कोशिश कर रहा था, ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।

एर्दोगन ने चेतावनी दी कि यदि यह जंग लंबी चली तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल संघर्ष विराम की दिशा में कदम उठाने की अपील की।

इस बीच एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तुर्की की यह प्रतिक्रिया सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि वह ईरानी शासन के बने रहने को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता मानता है। रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता।

विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की के इस रुख से NATO के भीतर मतभेद उभर सकते हैं। यदि तनाव बढ़ता है तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।