सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को फांसी: क्या था असली मामला? परिवार ने बताई ये बातें
मक्का/ढाका: सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सऊदी अधिकारियों ने इसे मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य से जुड़ा मामला बताया है। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि दोनों को चुंबन लेने के कारण फांसी दी गई। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक बयान और BBC की रिपोर्ट इस दावे की पुष्टि नहीं करते।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, नजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सिटी अख्तर को 14 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड दिया गया। सऊदी गृह मंत्रालय के सार्वजनिक बयान में कहा गया कि दोनों को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सजा दी गई। लेकिन बयान में कथित कृत्य का विस्तृत विवरण, गिरफ्तारी की सटीक तारीख और मुकदमे में पेश किए गए सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए।

BBC की रिपोर्ट में महिला के परिवार ने क्या बताया?
BBC News हिन्दी की रिपोर्ट के मुताबिक, सिटी अख्तर रोजगार के लिए फरवरी 2023 में सऊदी अरब गई थीं। वह एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के माध्यम से वहां पहुंची थीं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि सऊदी अरब जाने के करीब छह महीने बाद उन्हें जानकारी मिली कि सिटी जेल में हैं।
सिटी की बड़ी बहन ने BBC बांग्ला को बताया कि उनकी बहन जेल से समय-समय पर फोन पर परिवार से बात करती थीं। परिवार को उनकी हिरासत की जानकारी थी, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि उन्हें मृत्युदंड दिया जाने वाला है। बहन के मुताबिक, सिटी ने गिरफ्तारी के कारणों के बारे में विस्तार से नहीं बताया था।
परिवार का कहना है कि सिटी ने एक बार बताया था कि कई लड़कियां एक कमरे में रहती थीं और गाड़ियां खरीदने से जुड़े किसी आरोप के बाद उनके मालिक ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था। हालांकि, परिवार को मामले की पूरी जानकारी नहीं थी और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, सिटी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की पहले शादी हुई थी, लेकिन करीब दो साल बाद तलाक हो गया था। इसके बाद वह रोजगार के लिए सऊदी अरब गई थीं। परिवार ने यह भी कहा कि सिटी ने उस बांग्लादेशी पुरुष के बारे में कभी कुछ नहीं बताया, जिसे उनके साथ मृत्युदंड दिया गया।
नजरुल इस्लाम कब गिरफ्तार हुए थे?
इस मामले में गिरफ्तारी की सटीक तारीख अब भी स्पष्ट नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में नजरुल इस्लाम के अगस्त 2023 से हिरासत में होने की जानकारी दी गई है, लेकिन सऊदी अधिकारियों के सार्वजनिक बयान में उनकी गिरफ्तारी की निश्चित तारीख नहीं बताई गई।
सिटी अख्तर के मामले में BBC की रिपोर्ट बताती है कि परिवार को सऊदी अरब जाने के करीब छह महीने बाद उनकी जेल में होने की जानकारी मिली थी। यह जानकारी गिरफ्तारी की तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती।
इसलिए दोनों को कब गिरफ्तार किया गया, कितने समय तक मुकदमा चला और मृत्युदंड का अंतिम फैसला कब सुनाया गया—इन सवालों का पूरा जवाब उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से नहीं मिलता।
क्या दोनों को चुंबन लेने के कारण फांसी दी गई?
फिलहाल इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने अपने सार्वजनिक बयान में चुंबन का उल्लेख नहीं किया है। बयान में केवल मस्जिद के भीतर कथित अनैतिक कृत्य का जिक्र है।
सोशल मीडिया पर दोनों को प्रेमी जोड़ा या पति-पत्नी बताने वाले दावे भी सामने आए हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से उनके संबंध की पुष्टि नहीं होती। इसलिए यह कहना कि उन्हें केवल चुंबन लेने के कारण मृत्युदंड दिया गया, उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।
बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से क्या पूछा?
बांग्लादेशी अधिकारियों ने सऊदी अरब से मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है। बांग्लादेश का कहना है कि उसके अधिकारियों और सऊदी अरब में स्थित राजनयिक मिशन को मृत्युदंड लागू किए जाने से पहले इसकी जानकारी नहीं मिली थी।
सरकार ने कथित अपराध का विवरण, न्यायिक प्रक्रिया और पूर्व सूचना नहीं दिए जाने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा है। महिला के परिवार को भी मृत्युदंड की जानकारी पहले से नहीं थी। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार की एक सदस्य को सोशल मीडिया के जरिए इस बारे में पता चला।
अब तक क्या पता चला और क्या अनुत्तरित है?
उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि होती है कि सऊदी अरब ने 14 अक्टूबर 2026 को दो बांग्लादेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिया और अधिकारियों ने मामले को मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य से जोड़ा।
BBC की रिपोर्ट से पता चलता है कि सिटी अख्तर का परिवार उनकी हिरासत के बारे में जानता था, लेकिन उसे मृत्युदंड दिए जाने की पूर्व जानकारी नहीं थी। दूसरी ओर, गिरफ्तारी की सटीक तारीख, कथित अपराध का पूरा विवरण, अदालत में पेश किए गए सबूत और फैसले का विस्तृत आधार अब भी सार्वजनिक जानकारी से स्पष्ट नहीं हैं।
इस मामले को केवल चुंबन लेने पर फांसी दिए जाने की घटना बताना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। इसी तरह, दोनों को साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा भी स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुआ है। मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए विस्तृत अदालती फैसला और सऊदी अधिकारियों का स्पष्ट स्पष्टीकरण जरूरी है।