India-China News: 7 साल बाद भारत पहुंचे Xi Jinping, PM Modi से मुलाकात; चीन ने दिए बातचीत के संकेत
India-China News: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उनका यह दौरा 2020 की गलवान झड़प के बाद भारत यात्रा के लिहाज से खास माना जा रहा है। BRICS समिट में हिस्सा लेने के बाद शी जिनपिंग की पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
भारत पहुंचते ही PM मोदी से मिले Xi Jinping
शी जिनपिंग भारत मंडपम पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक, BRICS समिट के बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत होनी है।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन के रिश्तों में 2020 की Galwan Clash के बाद तनाव बढ़ा था। शी जिनपिंग इससे पहले अक्टूबर 2019 में भारत आए थे।
चीन ने भारत के साथ मतभेद सुलझाने की बात कही
शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चीन की ओर से बयान जारी किया गया। इसमें भारत के साथ बातचीत बढ़ाने और आपसी मतभेदों को सुलझाकर आगे काम करने की इच्छा जताई गई।
ऐसे में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को लेकर इस दौरे पर नजर बनी हुई है।
गलवान के बाद भी दोनों देशों का कारोबार बढ़ा
रिपोर्ट में भारत-चीन व्यापार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आंकड़ा भी सामने रखा गया है। 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। यानी गलवान झड़प के बाद भी चीन से भारत का आयात लगभग दोगुना हुआ।
यह स्थिति बताती है कि सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध पूरी तरह रुके नहीं।

Xi Jinping के साथ भारत आए Cai Qi
शी जिनपिंग के साथ चीन के वरिष्ठ नेता कै शी (Cai Qi) भी भारत पहुंचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पोलितब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य और पार्टी के जनरल ऑफिस के प्रमुख हैं। उन्हें शी जिनपिंग के करीबी सहयोगियों में माना जाता है।
उनका काम पार्टी और शीर्ष नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक, दस्तावेजी और बैठक संबंधी मामलों से जुड़ा है।
2019 में महाबलीपुरम आए थे Xi Jinping
शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनका स्वागत किया था। दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करते हुए द्विपक्षीय संबंधों पर अनौपचारिक बातचीत की थी।
उस समय दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए बातचीत जारी रखने पर जोर दिया गया था।