26th SCO Summit: PM Modi ने Security, Connectivity और Opportunity पर रखा भारत का विजन ,शी जिनपिंग, पुतिन और पीएम मोदी… ऐसे गर्मजोशी से मिले दिग्गज

26th SCO Summit: PM Modi ने आतंकवाद, कनेक्टिविटी और विकास पर रखा भारत का विजन, कहा- Vision से Outcomes की ओर बढ़ना होगा

बिश्केक: 26वें SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity के तीन प्रमुख स्तंभों के रूप में सामने रखा। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में Shanghai Cooperation Organisation (SCO) ने यूरेशिया में संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा विकसित की है। अब अगले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलना लक्ष्य होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति के आतिथ्य और स्वागत के लिए आभार जताया। उन्होंने किर्गिज़स्तान और उज़्बेकिस्तान के Independence Day पर दोनों देशों के लोगों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने World Nomad Games की Opening Ceremony का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किर्गिज़स्तान की समृद्ध संस्कृति और साझा विरासत की झलक देखने को मिली।

SCO में Security, Connectivity और Opportunity पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली बैठक में उन्होंने SCO को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों—S for Security, C for Connectivity और O for Opportunity—का उल्लेख किया था। अब जरूरत इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस Outcomes में बदलने की है।

उन्होंने कहा कि इसकी पहली आवश्यकता शांति और सुरक्षा है। आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई केवल action-reaction तक सीमित नहीं रह सकती।

उनके मुताबिक आतंकवाद के financing, recruitment, radicalisation और safe havens के पूरे ecosystem को खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड पर सख्त संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को पनाह या समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए strategic asset नहीं हो सकता।

उन्होंने शांत और सुरक्षित यूरेशिया की आकांक्षा को अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जोड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा।

West Asia Crisis का असर पूरी दुनिया पर

प्रधानमंत्री ने West Asia के संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की interconnected दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव energy security, maritime trade और supply chains तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे संकटों का सबसे अधिक प्रभाव Global South के देशों पर पड़ता है। भारत का रुख बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तनावों और युद्धों का समाधान battlefield पर नहीं, बल्कि dialogue और diplomacy के जरिए होना चाहिए।

Drug Trafficking को बताया गंभीर खतरा

प्रधानमंत्री ने Drug Trafficking को केवल अपराध नहीं बल्कि युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने SCO के तहत security threats, organised crime, information security और narcotics जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बनाए जा रहे Centres को सकारात्मक कदम बताया।

उन्होंने इन संस्थानों को practical coordination और timely action का प्रभावी माध्यम बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

Connectivity में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी

SCO सहयोग के दूसरे प्रमुख स्तंभ Connectivity पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो markets को जोड़ते हैं, व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि Connectivity से जुड़े प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे SCO Charter की मूल भावना से भी जोड़ा।

भविष्य की Connectivity को व्यापक बताते हुए प्रधानमंत्री ने Roads, Railways और Air Corridors के साथ-साथ customs processes को सरल बनाने, digital documentation को बढ़ावा देने और logistics networks को अधिक efficient बनाने की जरूरत बताई।

Opportunity का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने SCO के तीसरे स्तंभ Opportunity को सीधे लोगों के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि संगठन के सहयोग का लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि SCO महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है और अगले 25 वर्षों में people-to-people ties को सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि SCO की सफलता का आकलन इस बात से होना चाहिए कि उसके प्रयासों से युवाओं को कितने नए अवसर मिले, entrepreneurs के लिए कितने नए बाजार खुले, किसानों को technology का कितना लाभ मिला और नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ।

Youth और Start-up से जुड़े भारतीय Initiatives का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि SCO में सहयोग केवल government driven नहीं, बल्कि people driven होना चाहिए। उन्होंने किर्गिज़स्तान की अध्यक्षता में SCO में youth engagement पर दिए जा रहे विशेष जोर का स्वागत किया।

उन्होंने SCO में भारत की ओर से लिए गए Start-up Forum, Young Authors’ Conclave और Young Scientists’ Forum जैसे initiatives का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष भारत की ओर से प्रस्तावित SCO Civilizational Dialogue Forum का जिक्र करते हुए कहा कि इसका पहला session इस वर्ष भारत में आयोजित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी देशों की सक्रिय भागीदारी से यह SCO में जीवंत संवाद का मजबूत मंच बनेगा।

चिंगिज़ ऐतमातोव के विचार का किया उल्लेख

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने किर्गिज़स्तान के महान साहित्यकार चिंगिज़ ऐतमातोव के विचार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अक्सर उन बातों पर अधिक ध्यान दिया जाता है जो लोगों को अलग करती हैं, जबकि उन्हें जोड़ने वाली बातों पर कम ध्यान दिया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि SCO के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है। उन्होंने विविधता को पहचान और साझा उद्देश्य को शक्ति बताते हुए बिश्केक से आगे बढ़ने का संकल्प सामने रखा।

उन्होंने कहा कि SCO को साझा भूगोल से साझा अवसरों की ओर, vision से outcomes की ओर और government driven cooperation से people driven partnership की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ समिट 2026 के दूसरे व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ गर्मजोशी के साथ मुलाकात की.

26वें SCO Summit में प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य फोकस आतंकवाद से मुकाबला, मजबूत Connectivity और SCO सहयोग का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने पर रहा। भारत ने SCO के अगले 25 वर्षों के लिए सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने और people-driven partnership को मजबूत करने की दिशा में अपना दृष्टिकोण सामने रखा।

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