Punjab University Election 2026: ABVP के अंकित बिधान की बड़ी जीत, 2,879 वोटों से बने अध्यक्ष; पंजाब चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चर्चा
चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) चुनाव 2026 में ABVP के अंकित बिधान ने अध्यक्ष पद पर 2,879 वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ABVP ने लगातार दूसरी बार छात्र परिषद के अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है। चुनाव परिणाम ऐसे समय आया है जब पंजाब की राजनीति में भी छात्र और युवा मतदाताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज है।
अंकित बिधान की जीत को फिलहाल विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का परिणाम माना जाना चाहिए, लेकिन पंजाब की व्यापक राजनीतिक तस्वीर में छात्र संगठनों की सक्रियता को लेकर इस चुनाव ने नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न राजनीतिक दल युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करते हैं।
2,879 वोटों से अंकित बिधान की जीत
PUCSC चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार प्रमुख उम्मीदवार मैदान में थे। ABVP के अंकित बिधान के अलावा NSUI के गुरमन सिंह सिद्धू, AAP समर्थित ASAP के आदिल बीर सिंह और ‘साथ’ के दर्शप्रीत सिंह ने चुनाव लड़ा।
नतीजे में अंकित बिधान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 2,879 वोटों की बढ़त के साथ अध्यक्ष पद हासिल किया। इस जीत के बाद ABVP के समर्थकों में उत्साह देखा गया।
अंकित बिधान ने अपनी जीत को केवल अपनी व्यक्तिगत जीत नहीं बताया, बल्कि इसे Gen Z की जीत करार दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम से युवाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ABVP के समर्थन का संकेत मिलता है।
हालांकि, छात्र परिषद चुनाव के नतीजे को सीधे पंजाब की विधानसभा राजनीति का जनादेश मानना उचित नहीं होगा। विश्वविद्यालय चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे, मतदाता समूह और चुनावी समीकरण अलग होते हैं।
लगातार दूसरी बार ABVP का अध्यक्ष
इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ABVP ने लगातार दूसरी बार PUCSC के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। इससे विश्वविद्यालय परिसर में संगठन की छात्र राजनीति में मजबूत स्थिति का संकेत मिलता है।
अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और Department Representative के पदों के लिए भी चुनाव हुए। विभिन्न पदों के लिए कुल 16 उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय रहा।
लगातार दूसरी जीत के बाद अब ABVP के सामने अपनी चुनावी सफलता को छात्र हितों से जोड़ने की चुनौती होगी। छात्रों की शिक्षा, कैंपस सुविधाएं, फीस, रोजगार और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मुद्दे नई परिषद के सामने प्रमुख विषय हो सकते हैं।
SOI के समर्थन ने बदले चुनावी समीकरण
चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) के छात्र संगठन Student Organisation of India (SOI) ने ABVP को समर्थन देने की घोषणा की थी।
पंजाब की राजनीति में SAD की अपनी महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान रही है और ऐसे में उसके छात्र संगठन का ABVP को समर्थन विश्वविद्यालय चुनाव के लिहाज से चर्चा का विषय बना। हालांकि, इस समर्थन का चुनाव परिणाम पर कितना सीधा प्रभाव पड़ा, इसका आकलन केवल आधिकारिक वोट आंकड़ों और चुनावी डेटा के आधार पर ही किया जा सकता है।
पंजाब की राजनीति से क्यों जोड़ा जा रहा है चुनाव?
पंजाब में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण वर्ग हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसरों में होने वाली छात्र राजनीति पर राजनीतिक दलों की नजर रहती है। PUCSC में ABVP की लगातार दूसरी जीत ने छात्र संगठनों के बीच बदलते समीकरणों को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
हालांकि, PUCSC चुनाव को पंजाब विधानसभा चुनाव का सीधा सेमीफाइनल या जनमत संग्रह बताना सही नहीं होगा। छात्र परिषद के चुनाव में स्थानीय कैंपस मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में प्रदेश स्तर के मुद्दे, उम्मीदवार, पार्टी संगठन और सरकार के कामकाज जैसे कई कारक प्रभाव डालते हैं।
इसलिए अंकित बिधान की जीत को फिलहाल पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में ABVP की मजबूत स्थिति के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।
सुरक्षा के बीच हुआ मतदान
PUCSC चुनाव के लिए मतदान सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ और 11:30 बजे तक चला। इसके बाद दोपहर में मतगणना की प्रक्रिया शुरू की गई। चुनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
अब नई छात्र परिषद के सामने चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने और छात्रों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी होगी। वहीं, ABVP की लगातार दूसरी जीत के बाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में आने वाले दिनों में संगठन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
अंकित बिधान की जीत ने जहां PUCSC में ABVP की स्थिति को मजबूत किया है, वहीं SOI के समर्थन ने चुनाव से पहले बने समीकरणों को भी चर्चा में ला दिया है। पंजाब की व्यापक राजनीति पर इसका कितना असर पड़ता है, यह अलग विषय है; फिलहाल इतना जरूर है कि पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में ABVP ने लगातार दूसरी बार अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।