Amu Entrance 2025 अल-फलाह ग़ौरी एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा वॉटर कैंप

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवेश परीक्षा के अवसर पर अल-फलाह ग़ौरी एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा वॉटर कैंप.

11 मई 2025 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कक्षा 6 से 9 की प्रवेश परीक्षाओं के अवसर पर अल-फलाह ग़ौरी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से एक बड़ी मानव सेवा का आयोजन किया गया।

इस परीक्षा में लगभग 22 से 25 हज़ार बच्चों ने भाग लिया,जबकि उनके माता-पिता की संख्या भी लगभग इतनी ही रही।

देश भर से, खास तौर पर यूपी, बिहार, दिल्ली और अन्य राज्यों से आए इन बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वॉटर कैंप लगाया गया, जो सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक सक्रिय रहा।

कैंप में विभिन्न वालंटियर्स ने दिल और जान से सेवाएं दीं:

मुफ़्लिह़ून अमन: जिन्होंने लगातार पानी बांटते हुए सब्र, सच्चाई और प्रेम का प्रदर्शन किया।
मुहम्मद जोहेब: अपने विनम्र व्यवहार से मेहमानों को पानी पिलाया, जो दिलों को छू गया।
मुहम्मद रेहान: पूरे दिन पानी भरने और बांटने की सेवा में लगे रहे।

मुहम्मद अनस: माता-पिता को छायादार स्थान पर बैठाने और मार्गदर्शन में मदद करते रहे।
हाफिज़ मुहम्मद रेहान: तिलावत-ए-क़ुरआन से दिन की शुरुआत की और सेवा में बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
मुहम्मद जुनैद: बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए हर समय तत्पर नज़र आए।

अल-फलाह टीचर: छात्रों और अभिभावकों का उत्साह बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सबीले सफ़र: पानी की निरंतर आपूर्ति के प्रबंध को संभाला।

अबू सअद: प्रशासनिक कार्यों को बखूबी संभाला और सभी को एकजुट रखा।

अब्दुल्लाह इकराम: अत्यंत शिष्टाचार और विनम्रता से मेहमाननवाज़ी की।

सादिक़ हुसैन मजिस्ट्रेट (संस्थापक, तालीमी बेदारी मिशन अलीगढ़): अपनी मौजूदगी से न केवल हौसला दिया, बल्कि स्वयं भी इस मिशन में शामिल रहे।

मैं सलमान ग़ौरी, शोध छात्र, ए.एम.यू. हमने इस अवसर पर आफ़ताब हॉल के कॉमन रूम में रहने की व्यवस्था भी की, ताकि दूर-दराज़ से आने वाले मेहमानों को सुविधा मिल सके।

सेवा का सवाब (हर सेवक के लिए एक संदेश)

जो प्यासे को पानी पिलाता है, अल्लाह क़यामत के दिन उसे जन्नत के चश्मे से सीराब करेगा।

अल्लाह की राह में की गई मेहनत और थकान, पसीने की एक बूँद के बदले अनगिनत नेकियों में बदल जाती है।

मुस्कान के साथ पानी देना, रसूल की सुन्नत है और जन्नत का रास्ता है।

ख़ुलूस-ए-नियत से की गई सेवा, इंसान को अल्लाह के क़रीब कर देती है।

मेहमाननवाज़ी और सेवा, ईमान का हिस्सा है।

यही है हमारा मिशन
“सेवा, ख़ुलूस और जागरूकता”
जिसे अल-फलाह ग़ौरी, तालीमी बेदारी मिशन और सभी वालंटियर्स ने मिलकर पूरा किया।
यह सिर्फ़ एक वॉटर कैंप नहीं था, यह एक मिशन था—इंसानियत के लिए, मुहब्बत के लिए, तालीम के लिए!

अल्लाह तआला हमारी इस मेहनत को क़बूल फ़रमाए और इसे सदक़ा-ए-जारिया बनाए। आमीन।