AMU में भारत–थाईलैंड शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संवाद, 25 थाई विद्यार्थियों समेत करीब 100 लोग हुए शामिल
सर सैयद फाउंडेशन ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कल्चरल एजुकेशन सेंटर (CEC), थाई स्टूडेंट्स एसोसिएशन इन इंडिया (अलीगढ़ शाखा) तथा एएमयू एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ थाईलैंड के सहयोग से मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी स्थित कल्चरल हॉल में भारत–थाईलैंड शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया।
“आसियान और उससे आगे: युवा सहभागिता के माध्यम से शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 25 थाई विद्यार्थी, अन्य छात्र-छात्राएँ, शिक्षक, शिक्षाविद् तथा गणमान्य अतिथि शामिल रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक समझ तथा जनस्तरीय संबंधों को मजबूत करना और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एम. रिज़वान खान, डीन, कला संकाय एवं समन्वयक, कल्चरल एजुकेशन सेंटर, एएमयू ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समझ और सहयोग को बढ़ावा देने में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विभिन्न देशों के युवाओं को जोड़ने, साझा अध्ययन, शोध तथा सांस्कृतिक संवाद के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. बंडित अरोमन (अलीग), डायरेक्टर ऑफ सिक्योरिटी एंड पीस मैनेजमेंट तथा हेड ऑफ द पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम, क्रिर्क विश्वविद्यालय, थाईलैंड ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने भारत और थाईलैंड के बीच शैक्षणिक साझेदारी, अंतर-सांस्कृतिक संवाद तथा युवा सहभागिता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दीर्घकालिक शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बनाए रखने में अंतरराष्ट्रीय पूर्व छात्र नेटवर्क की भूमिका को भी रेखांकित किया।
श्री बूनसर्म सुखपिन्यो (अलीग), उपाध्यक्ष, एएमयू एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ थाईलैंड तथा थाईलैंड के कृषि अर्थशास्त्र प्रशासन के पूर्व अधिकारी, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने एएमयू और उसके थाई पूर्व छात्रों के बीच मजबूत संबंधों को बनाए रखने तथा भारत और थाईलैंड के विद्यार्थियों, शिक्षाविदों एवं पेशेवरों के बीच निरंतर संवाद को प्रोत्साहित करने के महत्व पर बल दिया।
प्रो. सैयद अली नवाज़ ज़ैदी, प्रोफेसर, विधि विभाग, एएमयू तथा विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के पूर्व सलाहकार, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की सहभागिता, शैक्षणिक समावेशिता तथा विश्वविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
श्री फैसल नफीस, प्राचार्य, एसटीएस स्कूल, मिंटो सर्किल, एएमयू ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और आपसी सम्मान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करें।
प्रो. असफ़र अली खान, ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी टू द वाइस-चांसलर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहभागिता और संस्थागत सहयोग को विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों की शैक्षणिक परंपराओं से परिचित होने के अवसर विद्यार्थियों और शिक्षकों के बौद्धिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाते हैं तथा सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान विकसित करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों, पूर्व छात्र संगठनों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समुदायों के बीच सहयोगात्मक पहलों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत और थाईलैंड के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक संबंधों तथा सहयोग के नए अवसर विकसित कर सकते हैं।
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में एएमयू की विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन प्रो. निशात फातिमा, सुश्री नदा रीन (अलीग), एएमयू के श्री सैयद मुदस्सिर अली रिज़वी तथा सहायक लाइब्रेरियन डॉ. मुनव्वर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
डॉ. सैयद कलीम अफ़रोज़ ज़ैदी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं चेयरपर्सन, सर सैयद फाउंडेशन ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए शिक्षा, सांस्कृतिक समझ तथा साझा बौद्धिक आकांक्षाओं के माध्यम से देशों के बीच संबंध मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं की अंतरराष्ट्रीय संवाद में भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने में एएमयू के योगदान को भी रेखांकित किया।
श्री गुफरान अहमद, यूनिवर्सिटी डिबेट एंड लिटरेरी क्लब (UDLC) से जुड़े मेंटर एवं कल्चरल एजुकेशन सेंटर, एएमयू के आमंत्रित वक्ता, ने शैक्षणिक संवाद, बौद्धिक विकास और युवा सहभागिता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संवाद, आलोचनात्मक चिंतन और विचारों का आदान-प्रदान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक है।
कार्यक्रम के दौरान एएमयू के थाई विद्यार्थियों तथा सर सैयद फाउंडेशन के पदाधिकारियों को उनके योगदान और सहभागिता के लिए सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और विभिन्न शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आपसी संवाद का अवसर मिला।
भारत–थाईलैंड संबंधों को आगे बढ़ाने का संकल्प
श्री नावेद आलम, अध्यक्ष, सर सैयद फाउंडेशन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अध्यक्षता कर रहे अतिथि, मुख्य वक्ता, विशेष अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, सहयोगी संस्थानों, विद्यार्थियों तथा आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सर सैयद अहमद खान की शैक्षणिक विरासत से प्रेरित होकर शिक्षा, युवा सशक्तीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए फाउंडेशन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कार्यक्रम भारत और थाईलैंड के बीच विद्यार्थी सहभागिता, शैक्षणिक साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खोलेगा।
इस अवसर पर फाउंडेशन के महासचिव श्री अबू दाऊद, उपाध्यक्ष श्री एम. कामरान, सचिव श्री मोहम्मद रियाज़, श्री हसन मुस्तफा, श्री अदीबुर रब, श्री शाहीन कलाम इब्राहिम, श्री सरीम तथा श्री अफ्फान सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। फाउंडेशन के इंटर्न ज़ाफ़िर, अयान, सुफ़ियान और अली सहित अन्य सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री युसरा ज़ैदी, एमबीए छात्रा, एएमयू ने किया। औपचारिक सत्र के समापन के बाद अतिथियों और प्रतिभागियों के लिए हाई टी का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने अनौपचारिक संवाद और विचारों का आदान-प्रदान किया।
गौरतलब है कि सर सैयद फाउंडेशन वर्ष 2021 से 2026 तक अपनी पांच वर्ष की सेवा यात्रा पूरी कर रहा है। यह कार्यक्रम शिक्षा, युवा विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के लिए फाउंडेशन के निरंतर प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा।