AMU में National Youth Conference 2026, शहीद बाजी राउत और गुमनाम नायकों को किया याद

AMU News: शहीद बाजी राउत और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित राष्ट्रीय युवा सम्मेलन संपन्न

अलीगढ़, 1 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कल्चरल एजूकेशन सेंटर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा सम्मेलन-2026 ‘गुमनाम नायकों का स्मरण’ में विद्यार्थियों ने भारत के कम चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों, सांस्कृतिक स्मृतियों और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श किया।
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और ओडिशा अनुसंधान केंद्र के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का विषय ‘भारतीय इतिहास का उपनिवेश-मुक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित करना’ था। सम्मेलन की प्रेरणा ओडिशा के 12 वर्षीय नाविक शहीद बाजी राउत से ली गई, जिनका साहस और बलिदान स्वतंत्रता संग्राम में बच्चों और युवाओं सहित आम नागरिकों के योगदान का प्रतीक माना जाता है।

सम्मेलन का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को पारंपरिक कथाओं से आगे ले जाकर विद्यार्थियों को उन अनेक आवाजों, अनुभवों और प्रतिरोध के विभिन्न रूपों से परिचित कराना था, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता यात्रा को आकार दिया। साहित्यिक, कलात्मक, नाट्य और ज्ञान आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को इतिहास को केवल अध्ययन के विषय के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्रोत के रूप में समझने का अवसर मिला।
सम्मेलन की शुरुआत वाद-विवाद एवं साहित्यिक क्लब द्वारा आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता से हुई। विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आंदोलन के विस्मृत अध्यायों और कम चर्चित नायकों के बलिदान पर अपने विचार रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किए। इसके बाद प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का प्रारंभिक चरण आयोजित किया गया। शाम के समय नाट्य क्लब द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटकों ने ऐतिहासिक विषयों को परिसर के सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचाया और दर्शकों को रंगमंच के माध्यम से उनसे जोड़ा।

सम्मेलन के प्रमुख अकादमिक कार्यक्रमों में ‘भारतीय इतिहास का उपनिवेश-मुक्तिकरण’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन हिंदी विभाग के प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने किया। परिचर्चा में इस बात पर विचार किया गया कि औपनिवेशिक दृष्टिकोण ने भारतीय इतिहास के लेखन और उसकी व्याख्या को किस प्रकार प्रभावित किया तथा इतिहास की समावेशी समझ विकसित करने के लिए विभिन्न स्रोतों और आवाजों को शामिल करना क्यों आवश्यक है।
परिचर्चा में राजनीति विज्ञान विभाग की प्रो. अर्शी खान और प्रो. मुहीबुल हक, इतिहास विभाग के प्रो. एम. वसीम राजा, प्रो. परवेज नजीर, प्रो. सैयद अली काजिम और प्रो. मानवेंद्र कुमार पुंडीर तथा अंग्रेजी विभाग की प्रो. विभा शर्मा ने भाग लिया।

प्रो. तिवारी ने युवाओं को जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन और भारत के विविध अनुभवों की समझ के साथ इतिहास को देखने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। परिचर्चा में अभिलेखागार, मौखिक इतिहास, क्षेत्रीय परंपराओं और अन्य स्रोतों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
आयोजन कैनेडी सभागार में हुआ, जिसमें चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद खालिद और यूनानी चिकित्सा संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सैयदा आमिना नाज भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के अंतिम चरण और विद्यार्थियों के भाषणों से हुई।

शहीद बाजी राउत और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को समर्पित एएमयू का राष्ट्रीय युवा सम्मेलन संपन्न

अतिथियों का स्वागत करते हुए सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र के समन्वयक प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य ऐसे सार्थक मंच उपलब्ध कराना है, जहां विद्यार्थी सांस्कृतिक शिक्षा को वर्तमान नागरिक जिम्मेदारियों और राष्ट्र के विकास से जोड़ सकें। उन्होंने भारत के इतिहास के कम चर्चित अध्यायों को युवाओं तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया, ताकि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े साहस, बलिदान, दृढ़ता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक बने रहें।
प्रश्नोत्तरी के अंतिम चरण और नुक्कड़ नाटक के अंतिम प्रदर्शन ने दर्शकों में खासा उत्साह पैदा किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिंदुस्तानी संगीत क्लब, लोक एवं पारंपरिक संगीत क्लब, पश्चिमी संगीत क्लब और फ्यूजन संगीत क्लब के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दीं।

समापन समारोह में फाइन आर्ट्स क्लब के सदस्य हारिस रजा अशरफ ने उपस्थितजनों के सामने शहीद बाजी राउत का जीवंत चित्र बनाना शुरू किया। उनके ब्रश के साथ युवा शहीद का चित्र धीरे-धीरे कैनवास पर उभरता गया, जबकि फ्यूजन संगीत क्लब और अन्य संगीत क्लबों के सदस्यों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कला, इतिहास और संगीत के इस संगम ने सभागार में भावपूर्ण वातावरण पैदा कर दिया और यह राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का विशेष आकर्षण रहा।
समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में दीवान अशरफ खान, सुहैल और फुरकान अली की टीम विजेता रही, जबकि शहजर हुसैन, सारिम राशिद और एहसान फरहान उपविजेता रहे। निबंध लेखन में सारिम राशिद ने प्रथम, मोहम्मद हमीद ने द्वितीय और शाकिब खान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में अबू दाऊद, जुलकिफ खैरूवाला और शरफ उल्लाह खान विजेता रहे।

कार्यक्रम का संचालन वाद-विवाद एवं साहित्यिक क्लब के मार्गदर्शक गुफरान अहमद और फ्यूजन संगीत क्लब के अध्यक्ष डॉ. अनवर अहमद ने किया। हिंदुस्तानी संगीत क्लब के अध्यक्ष प्रो. परवेज तालिब ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग की प्रो. विभा शर्मा, विश्वविद्यालय नाट्य क्लब की मार्गदर्शक, सैयद हामिद सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल ब्वायज के गुफरान अहमद, विश्वविद्यालय वाद-विवाद एवं साहित्यिक क्लब के मार्गदर्शक, बॉयज पॉलिटेक्निक के अनुप्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी अनुभाग के डॉ. मोहम्मद मुजाहिद अली खान, विश्वविद्यालय फ्यूजन संगीत क्लब के मार्गदर्शक, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के प्रो. परवेज तालिब, विश्वविद्यालय हिंदुस्तानी संगीत क्लब के अध्यक्ष, वीमेंस कालिज के भूगोल विभाग के डॉ. मंसूर आलम सिद्दीकी, विश्वविद्यालय वाद-विवाद एवं साहित्यिक क्लब के अध्यक्ष, वीमेन्स कालिज के ललित कला विभाग के डॉ. वसीम मुश्ताक, विश्वविद्यालय ललित कला क्लब के अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग के डॉ. मोहम्मद शरजील चैधरी, विश्वविद्यालय नाट्य क्लब के अध्यक्ष, सामाजिक कार्य विभाग की डॉ. कुर्रतुल ऐन अली, विश्वविद्यालय लोक एवं पारंपरिक संगीत क्लब की अध्यक्ष तथा वाणिज्य विभाग के डॉ. अनवर अहमद, विश्वविद्यालय फ्यूजन संगीत क्लब के अध्यक्ष ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रमों में सभी क्लबों के अध्यक्षों, मार्गदर्शकों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय युवा सम्मेलन ने इतिहास, अकादमिक विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्ति को युवा केंद्रित मंच पर एक साथ लाया। सम्मेलन में युवा शहीद बाजी राउत की स्मृति को केंद्र में रखते हुए विद्यार्थियों को उनके योगदान और विरासत को विभिन्न माध्यमों से समझने का अवसर दिया गया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अतीत का स्मरण केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूक, जिम्मेदार और सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिकों के निर्माण का माध्यम भी है।