एएमयू राइडिंग क्लब में ‘एक्टिंग कैप्टन’ की नियुक्ति पर सवाल, नियमों और पात्रता को लेकर उठी आपत्तियाँ

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के राइडिंग क्लब में शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए मोहम्मद हस्सान आरिफ को एक्टिंग कैप्टन बनाए जाने के बाद कई सवाल सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालय के नियमों और उपलब्ध दस्तावेज़ों के मुताबिक, यह नियुक्ति तय पात्रता शर्तों के अनुरूप नहीं बताई जा रही है।
विश्वविद्यालय के नियम साफ़ कहते हैं कि राइडिंग क्लब के कैप्टन पद के लिए उम्मीदवार का लगातार चार वर्षों तक बिना किसी ब्रेक के सदस्य होना ज़रूरी है। राइडिंग क्लब की सदस्यता हर शैक्षणिक सत्र के लिए अलग होती है, जिसमें चयन के साथ तय शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है।
2023–24 की सदस्य सूची में नाम न होने पर सवाल
इस पूरे मामले की अहम कड़ी विश्वविद्यालय खेल समिति द्वारा जारी की गई 2023–24 सत्र की आधिकारिक सदस्य सूची है। इस सूची में उन सभी छात्रों के नाम शामिल हैं, जिन्हें उस सत्र में राइडिंग क्लब का सदस्य चुना गया था।
जानकारी के मुताबिक, इस सूची में मोहम्मद हस्सान आरिफ का नाम दर्ज नहीं है, जबकि अन्य उम्मीदवारों के नाम इसमें मौजूद हैं। नियम जानने वालों का कहना है कि यदि किसी छात्र का नाम किसी सत्र की आधिकारिक सदस्य सूची में नहीं है, तो इसका मतलब आम तौर पर यही माना जाता है कि वह उस साल क्लब का सदस्य नहीं था। ऐसी स्थिति में सदस्यता की निरंतरता टूट जाती है, जो नियमों के अनुसार अपात्रता मानी जाती है।
‘एक्टिंग कैप्टन’ पद पर भी उठे सवाल
इसके बावजूद, 9 अक्टूबर 2025 को जारी एक कार्यालय आदेश के ज़रिये मोहम्मद हस्सान आरिफ को पूरे सत्र 2025–26 के लिए “एक्टिंग कैप्टन” नियुक्त कर दिया गया।
आलोचकों का कहना है कि राइडिंग क्लब के नियमों में ‘एक्टिंग कैप्टन’ नाम का कोई स्पष्ट पद नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह पद केवल नियमों से जुड़ी आपत्तियों से बचने के लिए बनाया गया।
शिक्षा से जुड़े मामलों को समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सुविधा नियमों से ऊपर नहीं हो सकती, और बिना नियमों के किसी नए पद का इस्तेमाल करना सही नहीं ठहराया जा सकता।
तरजीह और प्रभाव के आरोप, निष्पक्षता पर सवाल
इस मामले में कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि नियुक्त व्यक्ति के परिवारिक संबंध विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से बताए जा रहे हैं, जो विभागाध्यक्ष के पद पर हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि इस रिश्ते का असर फैसले पर पड़ा हो सकता है।
हालाँकि, इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह सवाल ज़रूर उठ रहा है कि जहाँ दूसरे उम्मीदवारों के मामलों में नियमों को सख़्ती से देखा गया, वहीं इस नियुक्ति में ढील क्यों दी गई।
पारदर्शिता और नियमों के पालन की ज़रूरत
छात्रों और विश्वविद्यालय से जुड़े जानकारों का कहना है कि खेल क्लबों में होने वाली नियुक्तियाँ केवल औपचारिकता नहीं होतीं, बल्कि वे न्याय, बराबरी और नियमों के पालन की मिसाल होनी चाहिए।
ऐसे में मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और साफ़ तरीके से जाँच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और विश्वविद्यालय की साख बनी रहे।
एएमयू राइडिंग क्लब में ‘एक्टिंग कैप्टन’ की नियुक्ति को लेकर पात्रता और नियमों पर सवाल उठे हैं। 2023–24 की सदस्य सूची में नाम न होने और नियमों में इस पद का स्पष्ट उल्लेख न होने से विवाद गहराया है।