“जब भी ज़मीर-ओ-ज़र्फ़ का सौदा हो दोस्तों,
क़ायम रहो हुसैन (अ.स.) के इंकार की तरह।”यौम_ए_आशूरा इमाम_हुसैन।
उम्मत-ए-मुहम्मदी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के इत्तेहाद के लिए हुसैन (अलैहिस्सलाम)!

अल्हम्दुलिल्लाह! 10 मुहर्रम, यौम-ए-आशूरा के मौक़े पर मिल्ली इत्तेहाद की रिवायत को क़ायम रखा गया ।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस इमामबाड़ा बैत-उस-सलात से शहीद-ए-कर्बला, हज़रत सैय्यदना इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नवासे और उनके 71 वफ़ादार साथियों की शहादत की याद में मातमी जुलूस निकाला गया।
परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया के कारकुनान ने हर साल की तरह इस साल भी शमशाद मार्केट चौराहे पर “सबील-ए-हुसैनी” लगाने का इंतज़ाम किया। इस मौके पर जुलूस में शामिल अज़ादारों और आए सभी लोगो को शरबत तकसीम किया गया ।
यह सबील इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की अज़ीम क़ुर्बानी को खेराज ए अक़ीदत पेश करने की एक अदना सी कोशिश है। कर्बला का यह अज़ीम पैग़ाम आज भी पूरी इंसानियत को सबक़ देता है कि “ज़िल्लत के साथ ज़ुल्म के आगे झुककर जीने से बेहतर है, इज़्ज़त और हक़ के साथ शहादत को गले लगाना।”