अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों से फिर आमना-सामना, ITBP प्रमुख बोले- कई जगहों पर जारी है तनाव
नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाल के दिनों में आमना-सामना होने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर ऐसी स्थिति बनी और यह अभी भी जारी है।
एनडीटीवी की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित ITBP के एक बेस पर जवानों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। इसी महीने के अंत में उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है।
सीमा पर तैनात किए गए शौर्य कमांडो
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल ने एक नई कॉम्बैट टीम ‘शौर्य कमांडो’ तैयार की है। उनके मुताबिक, इस टीम ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के साथ जारी आमना-सामना वाली परिस्थितियों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि शौर्य कमांडो को हर सीमा बटालियन में तैनात किया जाएगा, जिससे बल की विशेष पहचान और परिचालन क्षमता मजबूत होगी।
चीन सीमा को बताया सबसे चुनौतीपूर्ण
कपूर ने चीन के साथ लगने वाली सीमा को सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि चीन एक शक्तिशाली पड़ोसी है, इसलिए सीमा पर तैनात बलों को अपनी क्षमताएं लगातार बढ़ानी होंगी।
उन्होंने ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों की अहमियत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक के दौर में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण से बढ़ेगी जवानों की क्षमता
ITBP प्रमुख ने बताया कि जवानों की तैयारी बेहतर करने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य गलवान जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए जवानों की क्षमता बढ़ाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को यह प्रशिक्षण देने की योजना है।

सीमा की स्थिति पर पहले स्थिरता की बात
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले महीने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारत-चीन सीमा की स्थिति को स्थिर बताया था और चिंता की कोई वजह नहीं बताई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को भारत-चीन संबंधों के सामान्य होने के लिए जरूरी बता चुके हैं।
ITBP वर्ष 1962 में स्थापित हुआ था और चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा करता है।