AMU छात्र प्रतिनिधि चुनाव में बड़ा बदलाव, लिंगदोह समिति की शर्तें लागू नहीं होंगी; 5 नवंबर को मतदान
अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर अहम बदलाव किया गया है। अब विश्वविद्यालय कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों का चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बजाय AMU के अपने कोड ऑफ कंडक्ट के तहत कराया जाएगा। छात्रों की आपत्ति के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने पहले के फैसले में बदलाव किया है।
विश्वविद्यालय में करीब आठ साल बाद 5 नवंबर को छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव होने हैं। पहले चुनाव प्रक्रिया में लिंगदोह समिति की सिफारिशें लागू करने की व्यवस्था की गई थी, जिस पर छात्रों ने आपत्ति जताई थी।
छात्रों ने नियमों पर क्यों जताई आपत्ति?
छात्रों का तर्क था कि विश्वविद्यालय कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों और छात्रसंघ के चुनावों की प्रकृति अलग-अलग है। ऐसे में दोनों के लिए एक जैसे नियम लागू करना उचित नहीं है।
छात्रों के मुताबिक, लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत 75 प्रतिशत उपस्थिति और निर्धारित आयु सीमा जैसी शर्तें लागू होती हैं। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे या जिनके मामले विचाराधीन हैं, उनकी उम्मीदवारी भी प्रभावित हो सकती है।
अब AMU के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत चुनाव कराने के फैसले से अधिक विद्यार्थियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
कैंपस में चुनाव प्रचार तेज
नामांकन की तारीख नजदीक आने के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में चुनाव प्रचार तेज हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को विभिन्न हॉल में उम्मीदवारों ने छात्रों से संपर्क किया। लाइब्रेरी कैंटीन में भी दावेदारों की भीड़ रही, जहां उन्होंने विद्यार्थियों से समर्थन मांगा।
पंजीकरण और फीस का मुद्दा भी उठा
छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मुहम्मद जुहैर ने छात्रों के पंजीकरण और फीस से जुड़ी समस्याओं को लेकर कंट्रोलर से मुलाकात की।
उन्होंने मांग की कि किन्हीं कारणों से पंजीकरण नहीं करा सके विद्यार्थियों के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए, ताकि वे मतदान के अधिकार से वंचित न रहें। रिपोर्ट के अनुसार, 26 अक्टूबर को मतदाता सूची जारी होनी है।
जुहैर ने आर्थिक या अन्य कारणों से पूरी फीस जमा नहीं कर पाने वाले विद्यार्थियों को आवेदन के आधार पर दो किस्तों में फीस जमा करने की अनुमति देने की मांग भी की।
शोधार्थियों की समस्याओं पर भी ध्यान देने की मांग
मुहम्मद जुहैर ने कुछ वरिष्ठ शोधार्थियों की फीस, पंजीकरण और पहचान पत्र से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। उन्होंने मांग की कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए पंजीकरण पोर्टल खोला जाए और उन्हें विश्वविद्यालय की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंट्रोलर ने इन मांगों पर विचार करते हुए अगले दिन तक समाधान की दिशा में कदम उठाने का आश्वासन दिया।