Election Commission News: ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के बीच जानिए CEC को पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के बीच अब यह सवाल चर्चा में है कि आखिर भारत के CEC को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है। यह विवाद चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर चुनाव आयुक्तों की कथित आंतरिक आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ है। वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है और पिछले एक साल में SIR समेत सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
कैसे होती है CEC की नियुक्ति?
भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश होती है। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक सदस्य शामिल होता है। कानून के मुताबिक उनका कार्यकाल छह साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
CEC को कैसे हटाया जा सकता है?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए कदाचार साबित होना या अक्षमता आधार हो सकता है।
प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को प्रस्ताव का नोटिस देना होता है। प्रस्ताव के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। प्रस्ताव स्वीकार होने पर आरोपों की जांच के लिए समिति बनाई जाती है।
इसके बाद CEC को हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है। दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह महाभियोग प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
अभी विवाद किस बात पर है?
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और कामकाज को लेकर आंतरिक आपत्तियां उठाए जाने की बात कही गई है। इसके बाद विपक्षी दलों ने SIR में गड़बड़ी के आरोप लगाए और ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें हटाने की मांग की। ये आरोप संबंधित राजनीतिक दलों के हैं।