सलवार उतारना-छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं? हाईकोर्ट की टिप्पणी पर SC नाराज, जारी कर दिया नोटिस
नई दिल्ली: पटना हाईकोर्ट के एक फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी हिमांशु पाठक को नोटिस भी जारी किया है।
क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?
मामला वर्ष 2008 का है। पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की पीठ ने 9 जुलाई को इस मामले में फैसला सुनाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी हिमांशु पाठक ने एक महिला को अपने फोटोग्राफी स्टूडियो में बंद कर उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर यौन उत्पीड़न किया था।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप के प्रयास और अवैध रूप से बंधक बनाने का दोषी ठहराया था। बाद में पटना हाईकोर्ट ने रेप के प्रयास के आरोप से उसे बरी कर दिया।
छाती दबाने को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर मामले में लगाए गए आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तो यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का मामला बन सकता है, लेकिन रेप के प्रयास का अपराध साबित नहीं होता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि रेप की कोशिश के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। इसी फैसले में की गई टिप्पणियों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी का पक्ष सुने बिना इन टिप्पणियों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी हिमांशु पाठक को नोटिस जारी किया है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले में की गई संबंधित टिप्पणियों पर विचार किया जाएगा।