Azam Khan की गिरफ्तारी पर विरोध, Justice for Azam Khan अभियान चलाएंगे किसान संगठन

योगी सरकार मुस्लिम विरोधी मानसिकता के तहत आजम खान को जेल रखकर परेशान करके मारने की कर रही है साजिश

जेल से रिहाई के तुरंत बाद ईडी द्वारा आजम खान की गिरफ्तारी न्याय नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है – वीरेंद्र यादव, राजीव यादव

जस्टिस फॉर आजम खान अभियान चलाया जाएगा

आजमगढ़ 1 नवंबर 2026। पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान को जेल से रिहा होने के तुरंत बाद फिर से ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाने की घटना की पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने निंदा करते हुए राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई कहा। किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि वह पूरे प्रदेश में जस्टिस फॉर आजम खान अभियान शुरू करेंगे। वंचित समाज के लाखों लोगों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर सर्वोच्च न्यायालय और महामहिम राष्ट्रपति महोदय से न्याय की मांग की जाएगी। यह हमला सिर्फ आजम खान पर नहीं है, बल्कि आजम खान के बहाने अमन पसंद नागरिकों पर है, पिछड़े समाज पर है, दलित समाज पर है। यह सरकार आजम खान को एक सिंबल बनाकर पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज को डराना-धमकाना चाहती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव वीरेंद्र यादव और राजीव यादव ने कहा कि योगी सरकार मुस्लिम विरोधी मानसिकता के तहत आजम खान को जेल में रखकर परेशान करके मारने की साजिश कर रही है। दस बार विधायक, दो बार सांसद, चार बार कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान ने पहले भी अपनी जान को खतरा बताते हुए कह चुके हैं कि उनका फर्जी एनकाउंटर हो सकता है। ठीक इसी तरह पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ पर हेट स्पीच का आरोप लगाने वाले परवेज परवाज के साथ हुआ, जिन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल में इतना परेशान किया गया कि पिछले दिनों उनकी मौत हो गई। यह राजनीतिक प्रतिशोध के तहत बदले कार्रवाई है। जब एक व्यक्ति न्यायालय से सालों-साल जेल काटने के बाद रिहा हो रहा है तो उसी गेट पर दूसरी फर्जी एफआईआर में गिरफ्तार कर लेना साफ तौर पर उत्पीड़न और जहरीली राजनीति का हिस्सा है।

किसान नेताओं ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय खुलने से जेल के दरवाजे बंद होते हैं। यह हमला आजम खान पर नहीं है, बल्कि उन पिछड़े, दलित और वंचित समाज पर है जिसे सदियों से शिक्षा से महरूम रखा गया है। आजम खान ने विश्वविद्यालय बनाया है, न कि अपने लिए महल और अपने परिवार के लिए निजी संपत्ति बनाई है। अगर सरकार की मंशा उत्पीड़न की ही है तो पिछड़े, दलित वंचित समाज के सभी नागरिकों पर ईडी की कार्रवाई करे।

किसान नेताओं ने कहा कि योगी सरकार पिछले कई सालों से आजम खान और उनके परिवार को निशाना बनाकर फर्जी मुकदमे लगाकर उत्पीड़न कर रही है। मायावती और अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर दंगा भड़काने, समाज में अराजकता और नफरत फैलाने के आरोपों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की होती तो योगी आदित्यनाथ आज जेल की सलाखों के पीछे रहते, न कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर। योगी आदित्यनाथ के नफरत भरे भाषणों की पूरी सीरीज है। अखिलेश यादव कह चुके हैं कि योगी आदित्यनाथ की फाइल उनके पास आई थी पर उन्होंने कार्रवाई नहीं की। अगर अखिलेश यादव ने कार्रवाई की होती तो आज आजम खान समेत तमाम सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न, फर्जी एनकाउंटर-बुलडोजर की कार्रवाई नहीं होती, बल्कि योगी आदित्यनाथ जेल काट रहे होते। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों पर कोर्ट का सामना करने के बजाय खुद ही मुकदमे वापस ले लिए। जो व्यक्ति खुद अपने मुकदमे वापस ले ले, वह दूसरों को न्याय कैसे देगा।