UP Government के नौकरी वाले आदेश पर विवाद, आंदोलन करने वाले युवाओं के समर्थन में उतरे किसान संगठन

आंदोलन अपराध नहीं, सरकारी नौकरी से वंचित करने की धमकी मत दे योगी सरकार

लोकतांत्रिक देश में आंदोलन करने पर नौकरी से वंचित करना तानाशाही फरमान

नौकरी के नाम पर आंदोलन को अपराध बनाना लोकतंत्र की हत्या है

उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज द्वारा जारी किए गए उस शासनादेश पर सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया है कि आंदोलन, धरना, प्रदर्शन जैसी गतिविधियों में शामिल और व्यवस्था बदलने वाले संगठनों से जुड़ाव होने पर युवाओं को सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य माना जाएगा।

किसान नेता राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव वीरेन्द्र यादव ने कहा कि जिस दौर में छात्र फीस भरने के लिए खून बेच रहे हैं उस दौर में सरकार का यह निर्देश सीधे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है, यह लोकतंत्र को समाप्त करने की साजिश है।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि योगी सरकार अब डरा धमकाकर अपने हक और अधिकार की मांग कर रहे छात्रों और युवाओं की जुबान पर ताला लगाना चाहती है। यह आम नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार को छीनने की कोशिश है, जो पूरी तरह गैर कानूनी और गैर संवैधानिक है। हमारा देश ही आंदोलन से मिला है। पिछले दौर में भी जब-जब सरकारें छात्र हितों के खिलाफ़ हैं गई हैं तो बड़े-बड़े छात्र आंदोलन हुए हैं। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ प्रतिरोध दर्ज करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। किसी भी दशा में इसको दबाया नहीं जा सकता। हमारे पुरखों ने आंदोलन की ताकत पर इस देश को सजाया संवारा है और आजाद कराया है। आजादी के बाद भी इसी आंदोलन के जरिए तमाम सुधार हुए हैं।

किसान नेताओं ने कहा कि एक तरफ किसान-मजदूर अपना पेट काटकर किसी तरह अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार देने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। अब जब युवा रोजगार मांग रहे हैं तो सरकार उन पर मुकदमा लादकर उनका भविष्य खत्म करना चाहती है।

आजमगढ़ में CIB न्यूज के संपादक वसीम अकरम को कोतवाल और सीओ सिटी द्वारा थाने पर बैठाकर दबाव बनाया गया कि सरकार की मंशा के अनुरूप खबर चलाएं। पिछले दिनों साहित्यकार सत्यम प्रजापति को भी नजरबंद किया गया। ये सभी घटनाएं समाज में आतंक और भय पैदा करने के उद्देश्य से की जा रही हैं।

आजमगढ़ की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि तहबरपुर इलाके में चिरावल के शिवम पाल की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद सरकार से मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे 30 युवाओं पर तहबरपुर पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया और 8 युवाओं को जेल भेज दिया। यह मुकदमा सिर्फ युवाओं के करियर को समाप्त करने के लिए किया गया है। युवाओं का भविष्य बर्बाद करने की साजिश रचने वाली पुलिस के खिलाफ आवाज़ उठाने पर किसान नेता राजीव यादव के घर पर पुलिस ने दबिश की। गुंडा एक्ट-गैंगस्टर लगाकर लोकतंत्र में आवाजों को दबाया नहीं जा सकता।

राजीव यादव और वीरेन्द्र यादव ने साफ चेतावनी दी कि सरकार इस तरह के तानाशाही निर्देश को तत्काल वापस ले। अगर यह काला शासनादेश वापस नहीं लिया गया तो किसान, मजदूर, छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी सारी जवाबदेही सरकार और प्रशासन की होगी।