एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में अली डे पर पांडुलिपि एवं पुस्तक प्रदर्शनी 3 जनवरी से

अलीगढ़, 1 जनवरीः हजरत अली इब्ने अबी तालिब की जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले अली डे के अवसर पर मौलाना आजाद लाइब्रेरी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अली सोसाइटी के सहयोग से 3 जनवरी को दो दिवसीय पांडुलिपि एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन करने जा रही है। इस प्रदर्शनी में हजरत अली के जीवन, गुणों और शिक्षाओं को उजागर करने वाली दुर्लभ पांडुलिपियों, पुस्तकों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक धरोहरों का अनूठा संग्रह प्रदर्शित किया जाएगा।

एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नइमा खातून 3 जनवरी, शनिवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे पुस्तकालय के संग्रहालय एवं पांडुलिपि प्रभाग में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगी। इस अवसर पर सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान और कुलसचिव प्रोफेसर आसिम जफर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

विश्वविद्यालय की लाइब्रेरियन प्रोफेसर निशात फातिमा ने बताया कि इस प्रदर्शनी में 50 से अधिक अत्यंत मूल्यवान पांडुलिपियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें हजरत अली द्वारा लिखित मानी जाने वाली पवित्र कुरआन की एक प्रति तथा लगभग 900 वर्ष पुरानी नहजुल बलागा की पांडुलिपि शामिल है, जो उनके खुत्बों, उपदेशों और सूक्तियों का प्रसिद्ध संकलन है। इसके अतिरिक्त खत्ते-नाखुन सुलेख में लिखी गई हजरत अली की प्रशंसा में कसीदा-ए-हाफिज तथा मुमताज महल के पिता आसिफ खान द्वारा लिखित दुर्लभ कसीदा भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। हजरत अली के जीवन और विरासत पर आधारित बहुभाषी पुस्तकों के साथ-साथ पवित्र कुरआन के दुर्लभ मुद्रित संस्करण भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आगंतुकों को सदियों पुरानी विद्वत्ता और सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराना है, ताकि वे ज्ञान, आध्यात्म और नैतिक चिंतन के क्षेत्र में हजरत अली के योगदान को गहराई से समझ सकें। उन्होंने इसे इतिहास, अध्ययन और प्रेरणा की ओर ले जाने वाला एक द्वार बताया।

यह प्रदर्शनी शनिवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे से सायं 5.00 बजे तक तथा सोमवार को पूर्वाह्न 10.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम जनता के लिए खुली रहेगी।