Mohammad Shahabuddin Birthday Anniversary: जब जेल से लड़ लिया चुनाव! जानिए राजनीति में आने की पूरी कहानी

10 मई: डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब का जन्मदिवस, सीवान आज भी याद करता है अपना “विकास पुरुष”

“कहते हैं… कुछ लोग सिर्फ राजनीति नहीं करते, बल्कि पूरा दौर बन जाते हैं…”

Siwan News आज 10 मई है। सीवान और बिहार की राजनीति में यह तारीख एक ऐसे नाम की याद दिलाती है, जिसकी चर्चा आज भी गांव की चौपाल से लेकर राजनीतिक गलियारों तक होती है — डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब।

10 मई 1967 को बिहार के सीवान ज़िले के प्रतापपुर गांव में जन्मे शहाबुद्दीन साहब ने छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की। धीरे-धीरे 90 के दशक में उनका नाम पूरे बिहार की राजनीति में गूंजने लगा। समर्थकों के बीच उनकी पहचान एक मजबूत जननेता, गरीबों की आवाज़ और “विकास पुरुष” के रूप में बनी।

Dr Mohammad Shahabuddin कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर?

कहा जाता है कि एक समय ऐसा भी आया, जब एक पैरवी को लेकर उनकी मुलाकात कांग्रेस विधायक कैप्टन त्रिभुवन नारायण सिंह से हुई। चर्चाओं के अनुसार, बात आगे नहीं बढ़ी और फिर शहाबुद्दीन साहब ने जेल से ही 1990 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।


जब चुनाव के नतीजे आए, तो वह विधायक बन चुके थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

– 1990 में पहली बार विधायक बने
– 1995 में दूसरी बार विधायक बने
– 1996, 1998, 1999 और 2004 में सीवान से सांसद चुने गए

यानि डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब दो बार विधायक और चार बार सांसद रहे।

समर्थकों के बीच मजबूत जनाधार

समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जाता था कि जब वह राजनीतिक कारणों से जेल गए और पेशी के लिए कोर्ट पहुंचे, तब बड़ी संख्या में समर्थक वहां मौजूद रहते थे। उस दौरान एक नारा काफी चर्चित हुआ था —

“वीर शहाबू मत घबराना,
तेरे पीछे सारा ज़माना।”

यह नारा उस दौर में उनके समर्थकों के बीच काफी सुनाई देता था और उनकी मजबूत जनाधार वाली छवि को दर्शाता था।

Mohammad Shahabuddin क्यों कहा जाता था “विकास पुरुष”?

सीवान में आज भी बड़ी संख्या में लोग उनके दौर को याद करते हैं। समर्थकों का कहना है कि उनके समय में सड़कें बेहतर रहती थीं, विकास कार्य तेजी से होते थे और आम लोगों की सीधी सुनवाई होती थी।

शिक्षा के क्षेत्र में भी कई स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ावा मिला। युवाओं को पहचान दिलाने और गरीबों की मदद करने की वजह से आज भी लोग उन्हें अपने दिलों में जगह देते हैं।

“50 रुपये में पूरे महीने इलाज” वाली चर्चा

सीवान की जनता के बीच एक बात आज भी काफी चर्चा में रहती है। लोग बताते हैं कि उनके दौर में डॉक्टर मनमानी तरीके से फीस और जांच का पैसा नहीं ले सकते थे। कई स्थानीय लोग दावा करते हैं कि सिर्फ 50 रुपये में पूरे महीने इलाज हो जाता था और गरीब आदमी भी बिना डर अस्पताल पहुंच जाता था।

“परिस्थितियों का मुख्यमंत्री” वाला बयान

डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब का एक बयान बिहार की राजनीति में काफी चर्चित रहा। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “परिस्थितियों का मुख्यमंत्री” बताया था। यह बयान आज भी राजनीतिक चर्चाओं में याद किया जाता है।

आज भी जारी है राजनीतिक विरासत

आज उनके बेटे बैरिस्टर ओसामा साहब सीवान के रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब बिहार की राजनीति का एक ऐसा अध्याय हैं, जिन्हें समर्थक आज भी अलग अंदाज़ में याद करते हैं। जन्मदिवस के मौके पर आज भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें याद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि व संदेश साझा कर रहे हैं।