सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के कामकाज के तरीकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है

Supreme Court News: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग के नाम पर कुछ फैसले लिए।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए?

वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बहु-सदस्यीय आयोग में फैसले सामान्यतः सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कामकाज में सत्ता के केंद्रीकरण, एजेंडा और मीटिंग के कार्यवृत्त में देरी या कमी तथा वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव हुए। इसमें यह भी आरोप है कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना कुछ अपीलें दायर की गईं।

SIR प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

याचिका में Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वकील विकास सिंह ने अदालत में कहा कि अगर किसी बहु-सदस्यीय आयोग का फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से नहीं हुआ, तो उस फैसले को आयोग का सामूहिक फैसला माना जाने को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

याचिका में अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) रिट की मांग की गई है। इसमें CEC से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत उन शक्तियों का इस्तेमाल किया, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग की सामूहिक संस्था को दिया गया है।

कानून में सामूहिक फैसले का प्रावधान

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए और यदि मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की राय अलग हो तो मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाएगा।

अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में होगी।