Aligarh News एलाइंस एजुकेशन एंड वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि आज से लगभग साढे 1400 साल पहले कर्बला का वाकिया पेश आया था इसके पीछे वक्त कि उसे समय उसे समय के तत्कालीन शासन यजीद ने यजीद का खास मकसद यह था कि इस्लाम जिसने दुनिया को हम और शांति का पैगाम दिया था और दुनिया को जुल्म और सितम से बचाने बचाया था।
1Muharram1446 में Aligarh Dhaurra Mafi के लियाकत बाग चिलकौरा में नई कर्बला शुरू की गई
इस्लाम और पूरी दुनिया से छोटे-बड़े जात बिरादरी रंग और नसल के भेद को मिटाया था उसकी मंशा यह थी कि इस्लाम को खत्म कर दिया जाए उसकी एक वजह यह भी थी कि इस्लाम जब आगे बढ़ने लगा तो बहुत से लोगों ने इस्लाम को अपनाया तो था लेकिन दिल से इस्लाम को नहीं अपनाया और वह अपने अंदर ऊंच-नीच छोटे-बड़े आजाद बिरादरी रंग और नल का फर्क लिए थे लेकिन इस्लाम ने जो वर्ल्ड ऑर्डर पेश किया था उसके आगे वह कुछ नहीं कर सकते थे समय ने करवट बदली और उसके बाद ऐसे लोग सत्ता में आ गए जो इन सब चीजों को रंगभेद नसल में फर्क करते थे उन्होंने मौका देखकर इस्लाम को खत्म करने की कोशिश की लेकिन इस्लाम को खत्म करने की कोशिश में वह तो खुद खत्म हो गए लेकिन इस्लाम नहीं खत्म हुआ और इन्हीं साजिशों का नतीजा यह था कि वह कर्बला का वाकया पेश आया ।
Asia का सबसे पढ़ा लिखा गांव कहां जाने वाला doharra mafi में नई कर्बला
इस सिलसिले में डॉक्टर मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि एक कर्बला इस्लाम को मिटाने के लिए कर्बला बनी लेकिन अब दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है जहां कर्बला ना हो क्योंकि कर्बला से इस्लाम का असल पैगाम जाता है उन्होंने कहाकी सिविल लाइंस में खास तौर पर जीवनगढ़ राजा नगर धोर्रा माफी लियाकत बाग में कर्बला के लिए कोई जगह नहीं थी ऐसे में इन लोगों को लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर शहर की पुरानी कर्बला शाह जमाल में जाना पड़ता था ऐसे में हकीकत बांधों के लिए बहुत मुश्किल हो जाता था इन लोगों की जरूरत को महसूस करते हुए लियाकत बाग चिलकोरा में एक जमीन पर नई कर्बला बनाई है इस बार इस कर्बला में बहुत से हकीकत बंधुओ ने अपने ताजिए भी दफन किए हैं उन्होंने उम्मीद जाहिर किया है कि अगले एक बरस के अंदर अंदर नई कर्बला बनकर तैयार हो जाएगी और काफी लोगों को भी साहू लत होगी।