वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एएमयू और इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के बीच समझौता
Amu News अलीगढ़, 30 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के बीच पुरातत्व, इतिहास, पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्रों में शैक्षणिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (डवन्) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह समझौता एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून, रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान, आईपीएस, और इतिहास विभाग के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी (सीएएस) के अध्यक्ष एवं समन्वयक प्रो. हसन इमाम द्वारा किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क की ओर से उपकुलपति एवं अध्यक्ष प्रो. चार्ली जेफरी, पुरातत्व विभाग की प्रमुख प्रो. निकी मिलनर और पर्यावरण एवं भूगोल विभाग के प्रमुख प्रो. रोलैंड गेहर्ल्स सहित वरिष्ठ शिक्षकों ने प्रतिनिधित्व किया।
यह समझौता अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भागीदारी के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम है और एएमयू के इतिहास विभाग के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के पुरातत्व और पर्यावरण एवं भूगोल विभागों के बीच आगामी पाँच वर्षों के सहयोग की नींव प्रदान करता है।
यह साझेदारी संयुक्त शोध परियोजनाओं, सह-लेखित प्रकाशनों और साझा आंकड़ों के माध्यम से उच्च प्रभावकारी अंतर्विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। साथ ही, इसमें कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, विजिटिंग फेलोशिप्स, अतिथि व्याख्यान तथा छात्र और शोधकर्ता विनिमय कार्यक्रम भी शामिल होंगे जो अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बहु-सांस्कृतिक अकादमिक समृद्धि प्रदान करेंगे।
प्रो. हसन इमाम ने कहा कि यह सहयोग इतिहास और पुरातत्व के ज्ञान को आगे बढ़ाने की हमारी साझा दृष्टि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।”
एएमयू में इस समझौते के संपर्क अधिकारी डॉ. आफताब आलम ने कहा कियह एमओयू एएमयू की दक्षिण एशिया के अतीत पर अग्रणी शोध की विरासत से प्रेरित है। हमारा उद्देश्य इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए समकालीन चुनौतियों का समाधान करना है।
यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क की ओर से संपर्क अधिकारी डॉ. एडम एस. ग्रीन ने कहा कि यह समझौता हमें अतीत के गहन आंकड़ों का उपयोग करते हुए सतत विकास पर वैश्विक चर्चाओं में भाग लेने और लोकहित में योगदान देने की क्षमता प्रदान करता है। यह नवाचारपूर्ण शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए आशाजनक मार्ग खोलता है।
इस सहयोग की निगरानी दोनों संस्थानों के नामित समन्वयक करेंगे, और विशिष्ट पहलों को परियोजना-आधारित समझौतों के अंतर्गत परिभाषित किया जाएगा.