AMU ने कोर्ट में नहीं दिखाए ज़मीन के कागज़
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रों द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल संख्या 1284/2025) को खारिज कर दिया है।
याचिकाकर्ता कैफ हसन ने याचिका में मांग की गई थी कि नगर निगम अलीगढ़ को एक भूमि पर कब्जा करने से रोका जाए, जो एएमयू की बताई गई थी और जहां एएमयू राइडिंग क्लब संचालित होता है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उक्त भूमि को नगर निगम ने अवैध रूप से अपने कब्जे में लेकर उस पर स्वामित्व दर्शाने वाला बोर्ड लगा दिया है।
हालांकि, माननीय न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और माननीय न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने पाया कि याचिका और पूरक हलफनामे में संबंधित भूमि की स्पष्ट पहचान नहीं दी गई है।
अदालत ने यह भी कहा कि एएमयू एक वैधानिक संस्था है, जिसे अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए उचित कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।
अतः छात्रों की ओर से दाखिल जनहित याचिका को स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका की खारिजी को अलीगढ़ नगर निगम या एएमयू के स्वामित्व पर किसी राय के रूप में न माना जाए।
यदि भविष्य में इस मुद्दे पर कोई विधिक प्रक्रिया प्रारंभ होती है, तो उसे इस आदेश से प्रभावित हुए बिना तय किया जाएगा
आक़िब खुर्शीद शोध छात्र ने कहा: MIC प्रॉपर्टी को अभी तक हटाया नहीं गया, AMU की तरफ से इनका काउंसलर केस में जरूरी दस्तावेज़ तक मुहैया नहीं कराया, RTI का जवाब तक MIC नहीं दे रहे, शेखुल जामिया को सिर्फ योगी से मिलने का टाइम है, फीता काटने और हॉल डिनर में वक्त दे रहीं इससे सर सय्यद की सोच को बचाने की इनकी संजीदगी साफ़ ज़ाहिर होती है, सर सय्यद साहब ने ख़ून पसीना एक कर के ज़मीनें, चंदे इस इदारे के लिए इकट्ठा किया मगर आज उनकी रूह को नोचा जा रहा, जहां जिस्म दफ़न है वहां की ज़मीनों का सौदा किया जा रहा, सब ख़ामोश हैं.
शोध छात्र सूफियान ने कहा:
AMU इंतजामिया इस ज़मीन को वापस लेने के लिए क्या कर रही? अभी तक क्या क़दम उठाया ये सब कौन बताएगा और कब? ये स्टूडेंट्स एंप्लॉई के बीच संदेह पैदा कर रहा
MPEd छात्र मोहम्मद फहद ने कहा:
हम चाहते हैं कि जिस तरह वीसी ने मजबूती के साथ लड़ी है चाहते हैं इसी तरह ज़मीन का केस पूरी मजबूती से लड़े वीसी मैडम ने जिस तरह चुप्पी साध रखी है इससे साफ़ ज़ाहिर है सबकी मिली भगत है