अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 73वां अली डे मनाया गया
73वां अली डे मनाया गया
अलीगढ़, 2 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कैनेडी ऑडिटोरियम में अली सोसाइटी के तत्वावधान में हजरत इमाम अली के जन्मदिवस की याद में 73वां अली डे समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नइमा खातून ने की।
ईरान से पधारे मुख्य अतिथि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने संबोधन में इमाम अली के व्यक्तित्व और गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बौद्विकता, न्याय, दायित्व और मानव गरिमा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज हम केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व का ही स्मरण नहीं कर रहे, बल्कि इमाम अली की जीवंत नैतिक विरासत से जुड़ रहे हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 73वां ‘अली डे’ आयोजित, न्याय और मानव गरिमा पर दिया गया ज़ोर

डॉ. इलाही ने कहा कि सही धर्म की बुनियाद बौद्विकता , न्याय और मानव सम्मान पर टिकी होती है। अक्ल के बिना ईमान गलत रास्ते पर ले जाता है, जबकि नैतिकता के बिना अक्ल हावी होने की प्रवृत्ति पैदा करती है। उनके अनुसार, इमाम अली के लिए न्याय कोई राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि समाज की मूल आधारशिला था। उन्होंने कहा कि सत्ता तभी मायने रखती है जब वह न्याय पर आधारित हो, क्योंकि शासक जनता का सेवक होता है।
उन्होंने इमाम अली की अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक शिक्षाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत जैसे विविध समाज में उनकी शिक्षाएं सामाजिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का संदेश देती हैं। एएमयू की अपनी पहली यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय और अली सोसाइटी को इस आयोजन के लिए बधाई दी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि हजरत अली ने न्याय, शांति, धर्म या मत के आधार पर भेदभाव का विरोध, समाज की बेहतरी के लिए उत्कृष्ट कार्य और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की शिक्षा दी।
अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. नइमा खातून ने अली डे की बधाई देते हुए कहा कि यह दिन इस्लामी इतिहास की एक महान और सम्मानित शख्सियत से जुड़ा है, जिन्होंने इस्लामी विचार और दृष्टि को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि हजरत अली अपने व्यक्तित्व, उच्च चरित्र, दूरदर्शिता, ज्ञान, अल्लाह का डर और निर्भीकता के लिए अद्वितीय थे।
प्रो. खातून ने कहा कि आज के समय में आत्ममंथन की जरूरत है और हमें अपने विचारों व कार्यों को पैगंबर-ए-इस्लाम और उनके सच्चे साथियों के जीवन की ओर मोड़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे उपयोगी ज्ञान प्राप्त करने का संकल्प लें, क्योंकि ज्ञान ही उन्हें ऊंचा उठाएगा और पहचान दिलाएगा। उन्होंने उच्च नैतिक मूल्यों को सफल जीवन की कुंजी बताया।
कुलपति ने यह भी कहा कि एएमयू के ईरान के साथ विशेष शैक्षणिक संबंध हैं और कई शैक्षणिक कार्यक्रम संयुक्त रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
सहकुलपति प्रो. एम. मोहसिन खान ने कहा कि हजरत अली की शिक्षाएं आज के दौर में भी बेहद प्रासंगिक हैं। वे मानव सभ्यता के इतिहास की एक आदर्श शख्सियत हैं, जिनका प्रयास समानता और न्याय पर आधारित व्यवस्था स्थापित करना था।
अतिथि वक्ताओं मौलाना एस. नजीबुल हसन जैदी (मुंबई) और डॉ. सैयद फैजान वारसी (खानकाह जैदिया वारसिया, इलाहाबाद) ने भी इमाम अली के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनके कथनों को उद्धृत करते हुए उन्हें मानवता के लिए नैतिक प्रकाश स्तंभ बताया।
डॉ. असगर एजाज (संरक्षक, अली सोसाइटी) ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि प्रो. मजहर अब्बास (अध्यक्ष, अली सोसाइटी) ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मेहमान शायर सैयद मेराज जैदी और हिलाल नकवी ने हजरत अली की शान में कविताएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने सराहा।
कार्यक्रम के दौरान पोस्टर, निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में सैयदा आले जहरा प्रथम, अमन खान द्वितीय और साजिद अब्बास रिजवी तृतीय रहे। निबंध प्रतियोगिता में अलीना नाज प्रथम, तनु यादव द्वितीय और सैयद मीसम रजा जैदी तृतीय स्थान पर रहे। भाषण प्रतियोगिता में अबू दाऊद, एम. कायम हुसैन और इंसिया हुसैन को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार मिला।
शहाब कौसर ने अली सोसाइटी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। सोसाइटी की गतिविधियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।