एएमयू परिसर में शिक्षक की हत्या: महिला नेतृत्व, छात्राओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गहराते सवाल
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे विशाल और प्रतिष्ठित शैक्षणिक परिसर में, शाम के समय लाइब्रेरी के आसपास टहलते हुए एबीके यूनियन स्कूल के कंप्यूटर शिक्षक दानिश राव की गोली मारकर हत्या हो जाना न केवल एक दर्दनाक घटना है, बल्कि यह पूरे कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर और असहज सवाल खड़े करता है।
यह वही परिसर है जहाँ विश्वविद्यालय की कमान महिला कुलपति प्रो. नइमा खातून के हाथों में है, जहाँ घटना स्थल के आसपास की लाइब्रेरी में महिला लाइब्रेरियन, बड़ी संख्या में महिला फैकल्टी सदस्य और रोज़ाना पढ़ाई के सिलसिले में आने-जाने वाली सैकड़ों छात्राएं मौजूद रहती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि इस संवेदनशील इलाके में एक शिक्षक की जान सुरक्षित नहीं है, तो छात्राओं और आम नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जा सकता है।
लाइब्रेरी इलाका: सबसे संवेदनशील, लेकिन सबसे कम सुरक्षित?
घटना जिस स्थान के पास हुई, वह विश्वविद्यालय का सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
यहाँ सुबह से देर शाम तक छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं की आवाजाही बनी रहती है।
इसके बावजूद सामने आ रही जानकारियों के अनुसार कई सीसीटीवी कैमरे निष्क्रिय बताए जा रहे हैं
प्रॉक्टोरियल टीम के पास वॉकी-टॉकी जैसी संचार व्यवस्था प्रभावी रूप से सक्रिय नहीं है
आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया तंत्र स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता
ये हालात कैंपस सुरक्षा में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं।
गेट बंद, परेशानी ज़्यादा, सुरक्षा फिर भी सवालों में
घटना के बाद विश्वविद्यालय के कई गेट बंद कर दिए गए हैं।
इससे खासकर छात्राओं, महिला शिक्षकों और कर्मचारियों को रोज़मर्रा की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—
गेट बंद होने के बावजूद ऐसी घटनाएँ क्यों नहीं रुक पा रही हैं?
क्या केवल रास्ते बंद कर देना ही सुरक्षा का समाधान है?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा का मतलब सिर्फ़ नियंत्रण नहीं, बल्कि निगरानी, संचार और त्वरित कार्रवाई है।
प्रॉक्टोरियल सिस्टम और जवाबदेही का सवाल
विश्वविद्यालय में क़ानून-व्यवस्था और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी प्रॉक्टोरियल सिस्टम पर होती है।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि मौजूदा व्यवस्था इस तरह की गंभीर घटनाओं को रोकने में कितनी सक्षम है।
जब—
सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हों,
संचार उपकरण निष्क्रिय हों,
और सुरक्षा स्टाफ़ संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो,
तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि प्रॉक्टर पद पर बैठे अधिकारी आने वाले समय में छात्राओं और फैकल्टी की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे।
दानिश राव: एक लोकप्रिय शिक्षक, फिर भी असुरक्षित
दानिश राव केवल एक शिक्षक ही नहीं थे, बल्कि वे हॉर्स राइडिंग क्लब के पूर्व कप्तान भी रह चुके थे।
खेलों से उनका गहरा जुड़ाव था और वे छात्रों व शिक्षकों के बीच एक लोकप्रिय और सम्मानित चेहरा माने जाते थे।
यदि कैंपस के भीतर इतनी पहचान रखने वाला व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं रह पाया, तो यह सवाल और गहरा हो जाता है कि—
एक आम छात्र, कर्मचारी या छात्रा की सुरक्षा का भरोसा आखिर कैसे किया जाए?
मोहम्मद नदीम अंसारी ने उठाए सवाल
इस पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एएमयू छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष, हॉर्स राइडिंग क्लब के पूर्व कप्तान और रिसर्च स्कॉलर मोहम्मद नदीम अंसारी ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे बड़े और आबाद कैंपस में इस तरह की घटना होना बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, यदि समय रहते सुरक्षा ढांचे की गंभीर समीक्षा नहीं की गई और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो इससे छात्रों और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो सकती है।
एक घटना, कई चेतावनियाँ
यह वारदात केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
यदि—
समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई,
तकनीकी और मानव संसाधनों में सुधार नहीं हुआ,
और महिला-केंद्रित सुरक्षा दृष्टिकोण पर ठोस काम नहीं किया गया,
तो ऐसी घटनाएँ भविष्य में और अधिक असुरक्षा पैदा कर सकती हैं।
अब ज़रूरत केवल शोक व्यक्त करने की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई, पारदर्शी जांच और वास्तविक सुधारों की है, ताकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक बार फिर ऐसा परिसर बन सके जहाँ छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी बिना भय के पढ़-लिख और काम कर सकें।