एएमयू के तीन शोधार्थी नोबेल पुरस्कार विजेता आइसक्यूब सहयोग परियोजना का हिस्सा, प्रो. फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार
अलीगढ़, 7 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तीन पीएचडी शोधार्थी अनुज कुमार उपाध्याय, गोपाल गर्ग और कृष्णमूर्ति जयकुमार प्रतिष्ठित आइसक्यूब सहयोग परियोजना के सदस्य हैं। इस परियोजना के प्रमुख और वैचारिक वास्तुकार प्रो. फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रो. हाल्जेन की दूरदर्शी सोच ने खगोल विज्ञान की एक नई शाखा ‘न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान’ की नींव रखी। उन्होंने दक्षिणी ध्रुव के नीचे मौजूद विशाल हिमनद बर्फ को न्यूट्रिनो जैसे अत्यंत सूक्ष्म उपपरमाण्विक कणों के प्राकृतिक संसूचक के रूप में उपयोग करने की परिकल्पना की। इसी सोच के परिणामस्वरूप आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला अस्तित्व में आई, जिसने वैज्ञानिकों को दूरस्थ ब्रह्मांड से आने वाले न्यूट्रिनो का पता लगाने और उनका अध्ययन करने में सक्षम बनाया।
प्रो. हाल्जेन के दूरदर्शी नेतृत्व में परिकल्पित आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला का निर्माण भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव पर अंटार्कटिक बर्फ की गहराई में किया गया। यह उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो ब्रह्मांड के अध्ययन के लिए दुनिया की प्रमुख वैज्ञानिक सुविधाओं में शामिल हो गई है। हालांकि आइसक्यूब एक दशक से अधिक समय से आंकड़े एकत्र कर रहा है, लेकिन इसके निर्माण की शुरुआत लगभग 17 वर्ष पहले हुई थी।
इस वेधशाला ने शोधकर्ताओं को हमारी आकाशगंगा से बाहर से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के प्रवाह को अलग करने में मदद की है। इसकी ऊर्जा का प्रवाह नासा के फर्मी उपग्रह द्वारा देखे गए आकाशगंगा के बाहर के उच्च-ऊर्जा फोटॉन प्रवाह के समान है। एक दशक से अधिक समय के अवलोकनों के विश्लेषण से इन उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के संभावित स्रोतों की पहचान में भी मदद मिली है। इसके संकेत कुछ सक्रिय आकाशगंगाओं में अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास मौजूद घने और छिपे हुए क्षेत्रों की ओर मिलते हैं, जिन्हें शक्तिशाली ब्रह्मांडीय त्वरक माना जा रहा है।
भौतिकी विभाग के अध्यक्ष और न्यूट्रिनो भौतिकी विशेषज्ञ प्रो. मोहम्मद सज्जाद अथर, जिनके मार्गदर्शन में तीनों पीएचडी शोधार्थी अपना शोध कार्य कर रहे हैं, ने इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान एएमयू के न्यूट्रिनो भौतिकी कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और आधुनिक कण भौतिकी के सबसे महत्वपूर्ण एवं रोमांचक क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की निरंतर भागीदारी को रेखांकित करता है।