केसीसी लोन के नाम पर किसान की जमीन कुर्क, 15 दिन में नीलामी की धमकी का किसान संगठनों ने किया विरोध
कॉरपोरेट का 3 लाख 20 हजार करोड़ माफ और किसान की कुर्की नहीं बर्दाश्त करेंगे
आजमगढ़ 7 अक्टूबर 2026। फूलपुर तहसील के खण्डौरा निवासी किसान मेवालाल की जमीन की कुर्की का पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने विरोध किया। सरकार की यह कार्रवाई बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तत्काल कुर्की वापस नहीं ली तो किसान संगठनों द्वारा फूलपुर तहसील से लेकर पूरे पूर्वांचल में जन अभियान चलाया जाएगा और सरकार को किसानों का कर्ज माफ करने के लिए मजबूर किया जाएगा।
पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव विरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने पूंजीपतियों का 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपया बट्टा खाते में डालकर माफ कर दिया, लेकिन डेढ़ लाख रुपये के लिए एक गरीब किसान की जमीन कुर्क की जा रही है। यह सरकार की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है। पूंजीपतियों की कर्ज माफी और किसानों की जमीन कुर्की, यही सरकार की नीति है।
किसान नेताओं ने मांग की कि किसान मेवालाल की कुर्की की कार्रवाई तत्काल रद्द की जाए और उसका कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए। नीलामी के फरमान को तत्काल वापस लिया जाए। इस घटना को नजीर मानते हुए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड पर दिए गए सभी छोटे और सीमांत किसानों के लोन की एकमुश्त माफी की घोषणा करे। जब तक कर्ज माफी की नीति नहीं बनती, तब तक किसानों की जमीन की कुर्की और नीलामी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
गौरतलब है कि आजमगढ़ की फूलपुर तहसील के ग्राम सभा खंडोरा निवासी किसान मेवालाल की जमीन 6 अक्टूबर 2026 को कुर्क कर दी गई। मेवालाल ने वर्ष 2007 में 1 लाख 50 हजार रुपये किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था। सरकार की नीतियों के चलते लगातार खेती में हो रहे नुकसान, बाढ़, सूखा और फसलों का उचित दाम न मिलने के कारण गरीब किसान मेवालाल अपना लोन जमा नहीं कर पाए। 6 अक्टूबर 2026 को बैंक कर्मचारी और फूलपुर तहसील के राजस्व कर्मी किसान के घर पहुंचे और उनके खेत के चारों तरफ लाल झंडी गाड़कर उनकी जमीन को कुर्क कर दिया और नोटिस थमा दिया कि 15 दिन के अंदर यदि कर्ज जमा नहीं किया तो खेत की नीलामी कर दी जाएगी।