महिला नेतृत्व को सम्मान: राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने एएमयू VC प्रो. नइमा खातून को चुना ‘वंदे मातरम् उत्कृष्टता पुरस्कार’ के लिए

एएमयू के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने भारत की सभ्यतागत दृष्टि पर दिया विशेष व्याख्यान

कुलपति प्रो. नइमा खातून, राज्यपाल के वन्दे मातरम उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए नामित



अलीगढ़, 14 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “डिकोलोनाइजिंग ए डिसिप्लिनः भारत की सभ्यतागत दृष्टि और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय संबंध” के उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन सभ्यता की निरंतरता, गहराई और वर्तमान वैश्विक संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

राज्यपाल ने भारत की बौद्धिक विरासत का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध पश्चिमी विद्वानों अरनोल्ड टोइनबी, मार्क टवेन और एलबर्ट आइंसटीन के विचारों को उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता को विश्व के महान चिंतकों ने भी सराहा है। उन्होंने प्राचीन आचार्य कोटिल्या की ‘षाड्गुण्य नीति’ का उल्लेख करते हुए बताया कि यह विदेश नीति के छह उपायों पर आधारित एक व्यावहारिक और संतुलित ढांचा प्रस्तुत करती है, जो राष्ट्रीय हित और शक्ति के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संचालित करने की समझ देती है।

मार्क ट्वेन के उस प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए, जिसमें भारत को मानव जाति की जन्मभूमि और इतिहास की जननी कहा गया है, राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मान भारतीयों ने स्वयं को नहीं दिया, बल्कि विश्व के विचारकों ने भारत की महानता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में पूर्व और पश्चिम के बीच संवाद और समन्वय की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वभर में अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है, लेकिन एएमयू में आयोजित यह सम्मेलन विशेष रूप से गरिमामय और उद्देश्यपूर्ण लगा। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि दृष्टि और कार्य एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। उन्होंने शिक्षाविद् डीएस कोठारी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का भविष्य उसकी कक्षाओं में तैयार होता है।

इस अवसर पर राज्यपाल कार्यालय ने कुलपति प्रो. नइमा खातून को महिला सशक्तिकरण और शैक्षणिक नेतृत्व में उनके योगदान के लिए ‘वंदे मातरम् उत्कृष्टता पुरस्कार’ देने की घोषणा की। एक लाख रुपये की धनराशि, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र पर आधारित यह पुरस्कार उन्हें प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विशेष संदेश भी पढ़ा गया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन ने भारत की शिक्षा व्यवस्था और सोच पर गहरा प्रभाव डाला, विशेषकर मैकॉले की शिक्षा नीति के माध्यम से। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को हटाने और भारतीय परंपराओं व मूल्यों पर गर्व को पुनर्स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं।

कुलपति प्रो. नइमा खातून ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि यह सम्मेलन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि ज्ञान का निर्माण किस दृष्टिकोण से होता है। उन्होंने अर्थशास्त्र, बौद्ध और जैन परंपराओं तथा मुगल सम्राट अकबर की ‘सुलह-ए-कुल’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सभ्यतागत धरोहर सह-अस्तित्व और नैतिक संवाद का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि एएमयू परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक है और इस प्रकार का सम्मेलन विश्वविद्यालय की मूल भावना के अनुरूप है।

सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. इकराम हुसैन ने सम्मेलन की सराहना की। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी ने अतिथियों का स्वागत किया और सम्मेलन की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। सम्मेलन संयोजक प्रो. उपेंद्र चैधरी ने बताया कि प्राप्त 251 शोध पत्रों में से 150 का चयन तीन चरणों की समीक्षा के बाद किया गया है और इन शोध पत्रों को आगे चलकर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मिर्जा असमर बेग ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

यह सम्मेलन इंडियन काउंसिल आॅफ वल्र्ड अफेयर्स, इंडियन काउंसिल आॅफ फिलोसिफिकल रिसर्च तथा इंडियन काउंसिल आॅफ सोशल साइंस रिसर्च के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।