नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया है। रिजिजू ने कहा कि सरकार कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार बातचीत और तालमेल बनाकर काम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष राजनीतिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं और राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
राहुल गांधी के साथ हुई अच्छी बातचीत: रिजिजू
किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई। उनके मुताबिक सरकार की ओर से एक विशेष मुद्दे को लेकर राहुल गांधी से अनुरोध किया गया और इसके अलावा कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।
रिजिजू ने कहा कि सरकार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ संवाद बनाए रखना चाहती है। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों पर सरकार और विपक्ष के बीच सहयोग जरूरी है।
संसद के सुचारू कामकाज पर चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक रिजिजू और राहुल गांधी के बीच हुई मुलाकात में संसद के मानसून सत्र के शेष समय में सदन के सुचारू संचालन को लेकर भी बातचीत हुई। सरकार की ओर से विपक्ष का सहयोग मांगा गया।
दोनों नेताओं के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की बात कही गई है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट वादा नहीं किया गया।
करीब 50 मिनट तक चली बैठक
दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक करीब 50 मिनट तक चली बताई गई। इस दौरान संसद के कामकाज से लेकर विपक्ष की मांगों तक कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी रखी।
इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर के दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले पर संसद में चर्चा की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष की ओर से इन मुद्दों को सदन के सुचारू संचालन से जोड़ा गया।
अमित शाह की संसद में मौजूदगी पर क्या बोले रिजिजू?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी से जुड़े सवाल पर रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री ने संसद में विधेयक पेश किए हैं और वह सुबह से शाम तक सदन में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जिस मंत्री से संबंधित विधेयक सदन में विचाराधीन होता है, स्वाभाविक रूप से उस मंत्री की सदन में मौजूदगी रहती है।
सरकार-विपक्ष के बीच संवाद पर जोर
रिजिजू का बयान ऐसे समय सामने आया है जब संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने संवाद और समन्वय के जरिए संसदीय कामकाज आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को दुश्मन समझें।
विशेष सत्र की खबरों पर सरकार का जवाब
इस बीच महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधायी एजेंडे को लेकर संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाए जाने की मीडिया रिपोर्ट भी सामने आईं। दावा किया गया था कि 16 से 18 अगस्त के बीच विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।
हालांकि सरकार ने ऐसी मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया। इस कारण महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर आगे सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच हुई बातचीत को सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। रिजिजू ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हित और संसद के सुचारू संचालन के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए।