Delhi High Court on Race Course Masjid: पानी-बिजली बहाली की याचिका खारिज

Delhi High Court: रेस कोर्स मस्जिद का Water और Electricity Connection बहाल करने से इनकार

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह मस्जिद रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित है। 7 अक्टूबर को बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के बाद मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने अदालत का रुख किया था।

इंडियन एक्सप्रेस की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर को याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में संपत्ति पर अधिकार और पहले दिए गए अदालती फैसले के दायरे से जुड़े गंभीर तथ्यात्मक विवाद हैं, जिन पर इस याचिका के तहत निर्णय नहीं किया जा सकता।

मस्जिद के इमाम ने दायर की थी याचिका

मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून परिसर में स्थित एक हुजरे में रहते हैं। बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के बाद उन्होंने 12 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मस्जिद को वक्फ अधिसूचित संपत्ति और 2009 में अधिसूचित Grade-II Heritage Structure बताया गया है।

Waqf Board ने कनेक्शन बहाल करने की मांग की थी

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी। बोर्ड का कहना था कि बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट वैध कारण के कनेक्शन काटे गए, जबकि सभी बकाया भुगतान किए जा चुके थे।

हालांकि, NDMC ने 15 अक्टूबर को कनेक्शन बहाल करने से इनकार कर दिया। परिषद ने कहा कि इलाके में झुग्गी संरचनाओं को हटाने का काम जारी है और इससे जनहानि का खतरा हो सकता है।

Race Course Masjid Delhi High Court
अदालत ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मस्जिद परिसर पर याचिकाकर्ता के अधिकार और 25 अगस्त के पूर्ववर्ती फैसले के दायरे से जुड़े मुद्दे इस याचिका में तय नहीं किए जा सकते।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि वक्फ बोर्ड, जिसे परिसर का मूल कब्जाधारी बताया गया, ने बिजली कनेक्शन काटे जाने को चुनौती नहीं दी थी। अदालत के अनुसार, बोर्ड द्वारा नियुक्त इमाम होने मात्र से मोहम्मद हारून को परिसर पर स्वतंत्र अधिकार प्राप्त नहीं होता।

रेस कोर्स क्लब परिसर में जारी है कार्रवाई

रेस कोर्स क्लब करीब 53 एकड़ क्षेत्र में फैला है और प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलाके में क्लब और आसपास की झुग्गियों को लेकर अलग-अलग कानूनी कार्यवाही चल रही है। केंद्र सरकार ने क्षेत्र पर कब्जा लेने के संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है।

हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मस्जिद को लेकर कोई Eviction Notice जारी नहीं किया गया था।

रेस कोर्स मस्जिद का मामला एक व्यापक चिंता की ओर ध्यान खींचता है। मस्जिदों से जुड़े विवादों में कभी जमीन और मालिकाना हक, कभी कथित पुराने धार्मिक ढाँचों, कभी अतिक्रमण तो कभी सड़क चौड़ीकरण जैसे कारण सामने आते हैं। उज्जैन में 2026 में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मस्जिद के कुछ हिस्से हटाने की कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।ज्ञानवापी और मथुरा की शाही ईदगाह के मामले भी लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन हैं।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मामले का इतिहास इससे भी गंभीर सवाल उठाता है। दिसंबर 1949 में मस्जिद के भीतर मूर्तियाँ रखे जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया और 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहा दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के फैसले में मस्जिद के विध्वंस को कानून के शासन का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह ऐसा कृत्य था, जिसे नहीं किया जाना चाहिए था।

सवाल यह है कि मस्जिद से जुड़ा विवाद जब भी सामने आता है, तो क्या उसका परिणाम अंततः उस धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचने के रूप में ही सामने आएगा? किसी भी पक्ष के दावे की जाँच कानून के तहत होनी चाहिए, लेकिन सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के दौरान धार्मिक स्थल की सुरक्षा, निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। अदालतों और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे ऐसे मामलों में कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करें, ताकि विवाद का समाधान न्यायिक प्रक्रिया से हो—किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाकर नहीं।