Amu News डा. मोहम्मद नजरूल बारी द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पेपर प्रस्तुत

Amu News अलीगढ, 15 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नजरूल बारी ने एक रिसोर्स पर्सन के रूप में सोसायटी ऑफ साउथ एशियन आर्कियोलॉजी (एसओएसएसए) के 8वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘भारत की पूर्व आधुनिक कला और मूर्तिकला में हिरण का प्रतिनिधित्व‘ विषय पर पेपर प्रस्तुत किया। यह सम्मेलन हाल ही में बिहार संग्रहालय, पटना और कला, संस्कृति और युवा मामलों के मंत्रालय, बिहार सरकार के सहयोग से पटना में आयोजित किया गया।

डॉ. बारी ने ‘पुरातत्व में हालिया शोध’ नामक एक तकनीकी सत्र की सह-अध्यक्षता भी की।

डॉ. बारी ने प्राचीन भारतीय कला को आध्यात्मिक या दैवीय कला के रूप में वर्णित किया जहां कला और मूर्तिकला सहित धार्मिक और गैर-धार्मिक दोनों ग्रंथों में धार्मिक विषयों के साथ हिरण का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने कहा कि 1206 ईस्वी के बाद से, तुर्की मूल के शासकों और बाद में अफगानों के पास भी चित्रकला को संरक्षण देने के लिए ज्यादा समय नहीं था जैसा कि हमने मुगलों के मामले में विशेषकर अकबर से लेकर शाहजहाँ तक देखा है।

उन्होंने कहा कि मुगलों की राजधानियों से क्षेत्रीय राज्यों में चित्रकारों के प्रवास ने वास्तव में चित्रकला में धार्मिक और गैर-धार्मिक दृष्टिकोणों के मिश्रण के साथ 17 वीं शताब्दी से कांगडा, राजस्थानी और पहाड़ी चित्रकला के विकास में मदद की।