Amu News अलीगढ़, 7 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वीमेन्स कॉलेज द्वारा शेख अब्दुल्ला, जिन्हें प्यार से ‘पापा मियां’ के नाम से जाना जाता है, और बेगम वहीद जहां, जो ‘आला बी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, की शादी की सालगिरह को चिह्नित करते हुए, कॉलेज सभागार में संस्थापक दिवस मनाया गया।
वीमेन्स कॉलेज उनकी जयंती के बजाय उनकी शादी की सालगिरह के अवसर पर अपना संस्थापक दिवस मनाता है। जिसके द्वारा कॉलेज की स्थापना और प्रशासन में बेगम वहीद जहां की महत्वपूर्ण भूमिका को श्रद्धांजलि दी जाती है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुकृता पॉल कुमार के साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त गणमान्य व्यक्तियों में वीमेन्स कॉलेज की प्राचार्य प्रो. नईमा खातून, महिला शिक्षा संघ की सचिव प्रो. जकिया सिद्दीकी और समन्वयक प्रो. शगुफ्ता इम्तियाज भी संस्थापक दिवस समारोह में शामिल हुयीं। ललित कला अनुभाग की छात्राओं ने उन्हें प्रशंसा के प्रतीक के रूप में पेंटिंग भेंट की।
मुख्य अतिथि सुकृता पॉल कुमार ने अपने ज्ञानपूर्ण शब्दों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने छात्राओं से आत्मनिरीक्षण करने और अपने जीवन के उद्देश्य को समझने तथा महान ऊंचाइयों को जीतने के लिए उस दिशा में लगन से काम करने का आग्रह किया। दर्शकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस्मत चुगताई जैसी प्रसिद्ध महिला लेखिकाओं के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की महिलाओं को शिक्षा और अन्य अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अलीगढ़ की लड़कियों के लिए पापा मियां एक मसीहा बनकर आए, जिन्होंने लड़कियों के लिए शिक्षा के इस संघर्ष को काफी आसान बना दिया, क्योंकि उन्होंने उनकी ओर से लड़ाई लड़ी। अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने कार्यक्रम की योजना के साथ-साथ मनोरम संगीत और कविता की सराहना की।
दर्शकों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज ने वीमेन्स कॉलेज की सफलता का श्रेय इसके संस्थापक पापा मियां को दिया। उन्होंने छात्राओं से आलोचनात्मक सोच और वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने का आग्रह किया। महिला-शिक्षा के प्रति सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के योगदान पर विचार करते हुए, उन्होंने छात्राओं को उनसे और अधिक सीख लेने के लिए उनकी जीवनियों को पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने 1906 के प्रतिरोध आंदोलन में बेगम सुल्तान जहां के अविस्मरणीय योगदान और भूमिका पर प्रकाश डाला और 1937 में मिरांडा हाउस और लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वुमेन आदि संस्थानों से पहले महिला कॉलेज की प्रारंभिक स्थापना को महत्वपूर्ण बताया।
अपने संबोधन में, प्रोफेसर नईमा खातून ने पापा मियां को भावभीनी श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए संस्थान की परिवर्तनकारी यात्रा पर विचार किया। उन्होंने कहा कि केवल कुछ पाठ्यक्रमों से अपनी शुरुआत करके यह कॉलेज फला-फूला है और इसने अपने बुनियादी ढांचे और इमारतों का विस्तार किया है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, मलेशिया और मिस्र जैसे विभिन्न देशों में कालिज की पूर्व छत्राओं के साथ 3000 से अधिक छात्राओं का वर्तमान समूह कॉलेज को वैश्विक मान्यता प्रदान करता है। उन्होंने कॉलेज की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।
छात्राओं के प्रयासों और दृढ़ संकल्प का सम्मान करने के लिए, पुरस्कारों के पहले खंड में कॉलेज के विभिन्न पाठ्यक्रमों में पुरस्कार पाने वालों में अंग्रेजी की जारा हबीब को शोआ फातिमा मेमोरियल अवार्ड, वाणिज्य की दिनिशा नानवानी को आले अहमद सुरूर अवार्ड, उर्दू की साबरीन इरशाद को मिस रजिया खानम मेमोरियल अवार्ड, अर्थशास्त्र की मरियम जिलानी को मिस आलिया खानम अवार्ड, गणित में अदीबा यूसुफ को हजाह अनीस फातिमा पुरस्कार और सांख्यिकी में नूरजहाँ आरा को (हजाह अनीस फातिमा पुरस्कार) से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कई पुस्तकों का विमोचन किया गया जिनमें डॉ. अफसाना परवीन की ‘अदब और शऊर-ए-अदब’, डॉ. मो. गनी खान की ‘सवानह-ए-हयातः बेगम अब्दुल्लाः बेगम वहीद जहां’ डॉ. सदफ फरीद की पुस्तक, ‘द स्टडी ऑफ इंटरफेथ डायलॉग इन जी-20’, प्रोफेसर सारिका वार्ष्णेय का अनुवाद ‘वेरुराव’, डॉ. शगुफ्ता नियाज की ‘कश्मीर उपन्यासों के आईने माई’ और डॉ. अंबरीन आफताब की ‘हजार रंग मैं डूबी हुई हवा’ शामिल हैं जिसे उन्होंने मिस नमिता सिंह के साथ मिलकर लिखा है। इसके अतिरिक्त विमोचन होने वाली पुस्तकों में डॉ. फिरोज अहमद की ‘संसाधन निष्कर्षण में स्थान पहचान और राजनीति’ और डॉ. शिवांगिनी टंडन की ‘महिलाओं का मानचित्रणः 18वीं -19वीं शताब्दी के भारत में लिंग का विमर्श’ शामिल हैं।कार्यक्रम में कई छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार प्रोफेसर जकिया सिद्दीकी द्वारा प्रदान किये गये। जिनमें आमना मेहदी को इतिहास के लिए मसूदा अदहमी पुरस्कार, आशना खान को राजनीति विज्ञान के लिए आबिदा समीउद्दीन पुरस्कार, जारा हबीब को अंग्रेजी के लिए प्रो. जाहिदा जैदी पुरस्कार, मरियम जिलानी को अर्थशास्त्र के लिए नैना लाल किदवई पुरस्कार, जुबिया नौशाद को संस्कृत के लिए बाला सुब्रमण्यम पुरस्कार, आमना मेहदी को इतिहास के लिए फातिमा जहरा बिलग्रामी पुरस्कार, साबरीन इरशाद को साहित्य के लिए प्रोफेसर सुरैया हुसैन पुरस्कार प्रदान किये गये।
डीन छात्र कल्याण द्वारा स्नातक छात्रों को जो पुरस्कार दिए गए, उनमें तान्या कायनात को अंग्रेजी अध्ययन के लिए डॉ. रजिया खान पुरस्कार, बिस्मा तहरीम राशिद फारूकी को इस्लामिक अध्ययन के लिए डॉ. रजिया खान पुरस्कार, मीना सेंगर को सुश्री निकहत शावर हुसैन एजुकेशन ट्रस्ट अवार्ड, संजना कुमारी को बीएससी छठे सेमेस्टर के लिए सुश्री अंजलिना खान मेमोरियल अवार्ड, मासूमा खान को मनोविज्ञान के लिए जाहिदा सुरूर अवार्ड, सैयदा अदीबा को रचनात्मक लेखन के लिए डॉ. कैसर जहां अवार्ड, सैयदा अक्सा को रचनात्मक लेखन के लिए बेगम रोशन मसूद पुरस्कार, तान्या कायनात, बिस्मा तहरीम राशिद फारूकी, इल्मा अतहर, अरीशा खान को मो. मनालुद्दीन पुरस्कार प्रदान किये गये।
उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ पाठ्येतर गतिविधियों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिये मारिया नूर को जाकिर हुसैन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि मरियम हमीदा को सम्मानित मुमताज जहां मेमोरियल पुरस्कार मिला। इसके अलावा, सत्र 2023-24 के लिए वीमेन्स कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ लड़की का खिताब सैयद अक्सा को प्रदान किया गया, जिन्हें सबसे प्रतिष्ठित पापा मियां पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर नाजिया हसन एवं डॉ. हुमैरा महमूद अफरीदी ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ. बुशरा हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।