AMU नर्सों का बड़ा आंदोलन: 350 स्टाफ पर 1300 बेड, काली पट्टी से जंतर-मंतर तक गूंजा विरोध

AMU नर्सों का आंदोलन: काली पट्टी से जंतर-मंतर तक उठी लंबित मांगों की आवाज़

अलीगढ़। AMU Nurses Association ने All India Government Nurses Federation के आह्वान पर अपनी लंबित मांगों को लेकर 2 फरवरी से 5 फरवरी 2026 तक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद 6 फरवरी को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। यह विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से आयोजित किया गया।

नर्सिंग कैडर की प्रमुख मांगों में संस्थान में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी को दूर करना, अत्यधिक कार्यभार और ड्यूटी प्रेशर को कम करना, पिछले 14–15 वर्षों से लंबित डीपीसी एवं पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना शामिल है। इसके साथ ही पूरी सेवा अवधि में एक ही पद पर कार्य करने की समस्या का समाधान, सेवानिवृत्ति के अंतिम समय तक नाइट ड्यूटी के दबाव को समाप्त करना और अस्थायी नर्सिंग स्टाफ को स्थायी नियुक्ति देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि ये समस्याएं केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। नर्सिंग स्टाफ की कमी और अत्यधिक कार्यभार के कारण मरीजों की सुरक्षा प्रभावित होती है, कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता कमजोर होती है।

एसोसिएशन के अनुसार संस्थान में लगभग 1300 बेड का मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहा है, जबकि वहां केवल लगभग 350 नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं, जो निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार अत्यंत कम है। इसके अलावा कई नर्सिंग कर्मचारी वर्षों से लगभग 19,500 रुपये प्रतिमाह वेतन पर अस्थायी रूप से कार्य कर रहे हैं। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद स्थायी नियुक्ति के बिना ही उनके सेवानिवृत्त होने की स्थिति बन रही है।

नर्सिंग कर्मचारियों ने सरकार और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि इन सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके और नर्सिंग कर्मचारियों को उनका न्यायसंगत अधिकार मिल सके। धरना प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ।